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Office Sex पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 640 बार

मेरी चालू बीवी-86

इमरान

28 Jan 2026 को प्रकाशित

मेरी चालू बीवी-86
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सम्पादक – इमरानरोजी की मस्त भरी जवानी मेरे केबिन में लहरा रही थी, उसकी प्रिंटेड साड़ी इतनी झीनी थी कि अगर वो प्लेन होती तो मैं दावे से कह सकता हूँ कि उसके तराशे हुए बदन का हर कोण आसानी से नुमाया होता।

रोजी के अंदर ख्वाइशें तो बहुत थीं पर उन पर उसकी शर्म ने पर्दा डाला हुआ था।

इसीलिए वह खुलकर कुछ भी करने से बहुत ज्यादा ही डर रही थी।

मैं उसके बारे में और सब स्थिति के बारे में सोच-सोच कर बहुत रोमांचित हो रहा था।

सलोनी अपने आप में बहुत ज्यादा मॉडर्न और खुले विचारों की लड़की थी, उसने बचपन से को-एड में पढ़ाई की थी और आधुनिक परिवेश में रही थी।

वो जो कुछ भी कर रही थी केवल खुद की मस्ती और ख़ुशी के लिए, इसके अलावा उसके मन में कुछ नहीं था, वो मुझसे बहुत प्यार करती थी और मेरे लिए कुछ भी कर सकती थी।

अगर मैं उससे एक बार कह दूँ कि ये सब मुझे पसंद नहीं है तो वो यकीनन सब कुछ छोड़ देगी, उसको मेरी भी हर पसंद का बहुत ख्याल है और सेक्स को केवल कुछ समय का मजा समझती है न कि प्यार की गहराई।

प्यार दिल की गहराई से किया जाता है और सेक्स चूत की गहराई से… इसका अंतर उसको अच्छी तरह से पता है।

हाँ वो मेरे सामने चुदवाने से जरूर संकोच करती है पर मजे में उसको कोई आपत्ति नहीं है।

पर शायद मैं उससे भी आगे हूँ या सलोनी को इसमें कोई आपत्ति नहीं कि मैं उसके सामने भी किसी को चोदूँ बल्कि चोद भी चुका हूँ… हाँ थोड़ी बहुत झिझक जरूर होती है।

पर उस झिझक को नशा दूर कर देता है, यह मैंने अच्छी तरह जान लिया था।

रोजी हिंदुस्तानी संस्कृति से बंधी लड़की है, उसके लिए शादी मतलब एक आदमी के प्रति पूरा समर्पित रहना है, वो इस सोच से निकलना तो चाहती थी परन्तु उसके संस्कार गुलामी वाले थे कि पति चाहे जितना जुल्म करे, पर तुमको सहते रहना है।

मुझे नहीं पता कि उसका पति कैसा है पर इतना अहसास हो गया था कि रोजी उसको पसंद नहीं करती अब यह देखने वाली बात थी कि संस्कारो में बंधी लड़की अपनी नापसंद चीज को कितनी जल्दी और कितने हद तक दरकिनार करती है।

रोजी अपनी जंजीरों से बाहर आना चाहती थी पर खुद उन जंजीरों को खोलने को राजी नहीं थी।

उसको अपने बदन पर परपुरुष का हाथ मजा तो देता था पर उसका दिल उसको गलत ही समझता था।

मैं रोजी के साथ कोई जोर जबरदस्ती करना नहीं चाहता था पर उसको इस खूबसूरत जिंदगी का कुछ अहसास कराना जरूर चाहता था।

मेरे अंदर एक जिज्ञासा यह भी थी कि सलोनी को तो मैंने अच्छी तरह देख परख लिया था कि वो सेक्स को किस हद तक ले जा सकती है।

पर रोजी तो शायद शादी से पहले मर्द के स्पर्श को भी नहीं पहचानती थी।

मैं पूरे पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि वो सुहागरात के समय कुआंरी होगी और अपने पति के अलावा उसने कभी किसी से कुछ करना तो छोड़ो, किसी और के बारे में कुछ अलग सोचा भी नहीं होगा।

अब यह देखना था कि अगर रोजी अपनी दबी हुई इच्छाओं को बाहर निकालने में कामयाब हो जाती है तब वो कैसा महसूस करती है और किस हद तक अपनी इच्छाओं को पूरा करती है।

सलोनी और रोजी दोनों ही शादीशुदा हैं पर दोनों में धरती आसमान का अंतर है… एक आज़ाद एवं खुले विचारों वाली और दूसरी संकीर्ण विचारों वाली !

रोजी के साथ सेक्स की बातें करने में और उसका शरमा-शरमा कर जवाब देने में बहुत मजा आ रहा था।

मैं समझ सकता था कि जीवन में पहले बार किसी परपुरुष का हाथ अपने नाजुक बदन पर महसूस करके उसको कितना आनन्द आ रहा होगा और उसने कैसा महसूस किया होगा कि एक गैर मर्द ने उसकी उस नाजुक चूत को देखा है जिसे आज तक उसने बाहर की हवा भी अकेले या फिर उसके अपने पति के सामने ही पड़ने दी थी।

केवल एक दिन की मस्ती ही ने उसको इतना खोल प्रिया था कि आज वो बिना कच्छी के आ गई थी। यह भी शायद पहली बार ही हुआ होगा जो उसने इतनी हिम्मत की।

हो सकता है शायद नीलू ने ही उसको इसके लिए बोला हो, पर उसका शरमाना और संकुचाना मुझे बहुत भा रहा था।

अपने चूतड़ों पर मेरा हाथ महसूस करके ही उसका चेहरा पूरा लाल हो गया था और जब मैंने कच्छी के बारे में बात की तब तो उसका चेहरे के साथ-साथ उसका पूरा बदन ही सिमट रहा था।

रोजी शर्म के मारे दोहरी हुई जा रही थी, लग ही नहीं रहा था कि उसने कभी लण्ड भी देखा हो या कभी चुदाई भी कराई हो।

बिल्कुल कुँवारी, नाजुक कली की भान्ति ही शरमा रही थी इस समय रोजी ! कल जो वो ज्यादा खुल गई थी या कुछ ज्यादा बोल्ड व्यबहार कर रही थी, उसकी वजह शायद नीलू थी।

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एक लड़की दूसरी लड़की के सामने खुद को थोड़ा ताकतवर महसूस करती है और अधिक बोल्ड हो जाती है।

मैंने सोचा शायद इसीलिए दो लड़के और एक लड़की या फिर दो लड़कियाँ और एक लड़का जैसे थ्री-सम में उन लोगों को ज्यादा मजा आता होगा।

मन ही मन मुस्कुराते हुए मैं इस ट्रिक को भी आजमाने की सोचने लगा।

रोजी के साथ ऑफिस का काम निबटाने में बहुत ही मजा आ रहा था। अब हम काफी हद तक खुल गए थे, मेरे मजाक करने और हमेशा खिलखिलाने से वो बहुत सहज हो गई थी।

फिर मैं उसके सामने ही टॉयलेट के लिए गया- ऐ रोजी, सुनो… कल का बदला पूरा हो गया है, अब मैं शूशू करने जा रहा हूँ तो देखने की कोशिश नहीं करना… ओके? …हा हा हा हा…

वो भी जोर से हंस पड़ी… मैं भी बेशर्मो की तरह दरवाजा बिना बंद किये मूतने लगा…

मुझे लगा वो मुझे नहीं देखेगी पर मेरा दिल ख़ुशी के मारे उछलने लगा जब मैंने उसको तिरछी नजर से अपनी ओर देखते हुए पाया।

भले ही उसको मेरा लण्ड नहीं दिख रहा था पर खुले लण्ड का अहसास तो वो कर ही रही होगी।

इसका अहसास मुझे बाहर आते ही हो गया… रोजी बड़ी कातिल नजरों से मुझे देख रही थी और उसके लाल रक्तमय होंठों पर हल्की मुस्कान भी थी।

मेरे बाहर आते ही वो भी बाथरूम की ओर बढ़ी।

मैं- क्या हुआ? हा हा हा… मुझे देखकर लग गई या पहले से रोकी हुई थी? हा हा…

पर रोजी ने कोई जवाब नहीं प्रिया, बस मुझे देखते हुए ही एक मुस्कुराहट दी, वो भी कुछ गुस्से में, प्यार वाला गुस्सा !

उसके टॉयलेट जाने के बाद मैं कुछ काम करने लगा पर जैसे ही मैंने दरवाजे की ओर देखा, मेरा माथा ठनका…

अरे यह क्या?? रोजी ने दरवाजा पूरा बन्द नहीं किया था, उसने दरवाजे पर थोड़ा सा हाथ मार कर बंद किया था, मुझे दरवाजा बंद होने वाली जगह से एक झिर्री नजर आई जहाँ से रोशनी बाहर आ रही थी।

अब मेरा दिल फिर से बेकाबू होने लगा कि कुछ करूँ या नहीं !

पर ऐसे तो मैं बेवकूफ कहलाऊँगा… अब उसने मेरे यहाँ रहते अगर दरवाजा खुला छोड़ प्रिया तो कुछ तो वो भी मस्ती के मूड में थी।

अब चाहे जो हो, मैंने कुछ तो शरारत करने का फैसला कर ही लिया था।

मैं जल्दी से दरवाजे के पास पहुँचा और मैंने दरवाजे पर हाथ मारते हुए ऐसे ही कहा- अरे रोजी, तुमने दरवाजा लॉक नहीं किया?

हाथ लगते ही दरवाजा खुल गया, सामने रोजी कमोड पर बैठी थी।

मैंने बिल्कुल सही समय पर ही दरवाजा खोला था… वो शायद अभी अभी ही मूतने बैठी थी और उसने करना शुरू कर प्रिया था क्योंकि उसके मूतने की शर्रर…शर्रर… की आवाज और कमोड में पेशाब गिरने की भी आवाज आ रही थी।

अब ना तो वो उठ सकती थी और ना ही कुछ कर सकती थी।

उसकी साड़ी कमर तक सिमटी थी जो उसने अपने हाथों से पकड़ी हुई थी और उसकी गोरी गोरी सफ़ेद टांगें, जो पूरी चिकनी थीं, नंगी दिख रही थी।

दरवाजे से उसकी चूत या फिर उससे निकलता मूत तो नहीं दिख रहा था परन्तु उसके नंगेपन का पता चल रहा था।

वो भौंचक्की सी मुझे देख रही थी… मैं उसको मूतते हुए देख कर हंस रहा था।

जब उसकी मूतन क्रिया पूरी हुई, तब उसको कुछ होश आया और…

कहानी जारी रहेगी।

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मेरी चालू बीवी

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भाग 30
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भाग 80
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भाग 84
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

पंकज मंडलोई

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

रिंकू कुमार

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।