इमरानमैंने भी अंदर देखा…एक और सरप्राइज तैयार था…अंदर अरविन्द अंकल और सलोनी थे…मैं थोड़ा आश्चर्यचकित हो जाता हूँ…अंदर बैडरूम के अंदर अरविन्द अंकल केवल एक सिल्की लुंगी में थे…वैसे वो पहले भी कई बार ऐसे ही आ जाते थे…पर आज उनकी बाँहों में मेरी सेक्सी बीवी मचल रही थी…मैंने पीछे हटती मधु को रोक लिया… उसको मुँह पर उंगली रख श्ह्ह्ह्ह का इशारा कर चुप रहने को कहा..वो भी बिल्कुल भी आवाज न कर मेरे साथ ही लगकर खड़ी हो गई…सलोनी ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी थी.. अंकल ने उसको पीछे से अपनी बाँहों में जकड़ा था…मैंने अपनी साँसों को कुछ नियंत्रित करते हुए उन दोनों की हरकतों पर ध्यान दिया…अंकल की हाइट ज्यादा थी… तो कुछ अपनी टांगों को मोड़कर नीचे हो गए थे…ऐसा उन्होंने अपने लण्ड को सलोनी की गाण्ड पर सेट करने के लिए किया था…अंकल का लण्ड सलोनी की मखमली, गद्देदार गाण्ड से चिपका था और वो अपनी कमर को लगातार हिलाकर लण्ड को रगड़ रहे थे…दोनों इस मजेदार रगड़ का मजा ले रहे थे…मुझे नहीं पता कि बीच में उनकी क्या स्थिति थी…सलोनी की झुकी होने से यह साफ़ था… कि उसकी ड्रेस उसके चूतड़ से खिसक ऊपर को हो गई होगी…इसका मतलब अंकल के लण्ड का अहसास उसको कच्छी के ऊपर से हो रहा होगा…पर मुझे यह नहीं पता था कि अंकल का लण्ड लुंगी से बाहर था या अंदर… अंकल ने अंडरवियर पहना था या नहीं…इन सभी बात से मैं अनजान था…तभी मेरी नजर ड्रेसिंग टेबल के दर्पण पर पड़ी… अंकल के बाँहों में चिपकी सलोनी की चूचियों पर उनका सीधा हाथ पूरी तरह लिपटा था और वो अपने पंजे से सलोनी की बायीं मस्त चूची को मसल रहे थे…यहाँ तक होता तब भी ठीक था… पर…अंकल का दायाँ हाथ आगे से उसकी ड्रेस के अंदर… सलोनी की टांगों के बीच था…उनके हाथ के हिलने से सलोनी की ड्रेस ऊपर नीचे हो रही थी…और यह महसूस हो रहा था… कि अंकल बड़े कलात्मक तरीके से मेरी इस बेकरार बीवी सलोनी की प्यारी चूत से छेड़छाड़ कर रहे हैं…अब मैंने उनकी बातों को सुनने का प्रयास किया…सलोनी- ओह अंकल मत करो ना… सब यहीं हैं…सलोनी- अंकल प्लीज छोड़ दो ना… अंकुर आ गए तो क्या सोचेंगे…अंकल- अरे वो नीचे है… मैंने खुद देखा था… तभी तो आया…सलोनी- ओह्ह्ह… मधु भी तो है…अंकल- अह्ह्ह… हाआआआ… व…वो रसोई में है…अंकल- आह्ह्हा… अह्ह्ह… यार… ये बता कि कैसा लग रहा है???सलोनी- आपका अच्छा ख़ासा तो है…अंकल- केवल तेरे गरम बदन से ही इतना बड़ा हुआ है… वरना तेरी आंटी के पास इतना बड़ा नहीं होता…तभी सलोनी ने अपना बायाँ हाथ पीछे कर…सलोनी- ओह अंकल कितना बड़ा है…ओह उसने अंकल का लण्ड पकड़ा था…वो थोड़ा साइड में हुए… तो मैंने देखा कि अंकल का लण्ड लुंगी से बाहर था…सलोनी ने उनके लण्ड पर अपना हाथ फिराया… और उसको लुंगी के अंदर कर दिया…सलोनी- सच अंकल आप बिल्कुल निराश मत हो… आपका अंकुर से भी बड़ा और मजबूत है…अंकल- पर तुम्हारी आंटी के सामने यह धोखा दे देता है… सच बेटा… कल तुमको नंगी देख… कई महीने बाद मैं उसको संतुष्ट कर पाया… पर यकीन मानो मैं तेरे को सोच कर ही उसको चोद रहा था…सलोनी- धत्त अंकल कैसी बात करते हो… अब आप जाओ… अंकुर आते ही होंगे…अंकल बाहर को आने लगे… मैंने मधु को तुरंत रसोई में किया… और खुद दरवाजे से ऐसे अंदर को आया कि… अभी आ ही रहा हूँ…मैं- ओह अंकलजी नमस्ते…अंकल हड़बड़ाते हुए- हा ह ह हाँ बेटा… कैसे हो?मैं- ठीक… हूँ और आप?अंकल- मैं भी बेटा… बस तुम्हारी आंटी के सर में दर्द था… तो गोली लेने आ गया था…मैं- अरे तो क्या हुआ…??? आप ही का घर है…अंकल- अच्छा सलोनी बेटा… मैं चलता हूँ फिर… बाय !सलोनी- बाय…वो दरवाजा बंद करके मुझसे बोली- …गए वो लोग… अब फिर क्या कह रहे थे…मैं बैडरूम में जाते हुए- …कुछ नहीं… अब फिर कभी आएंगे…सलोनी रसोई में जाते हुए…सलोनी- ठीक है… आप चेंज कर लो… मैं खाना लगवाती हूँ…मैं- ह्म्म्म्म्मबैडरूम में जाते ही मुझे एक और झटका लगता है…मुझे याद था सलोनी ने जो कच्छी पहनी थी… वो ड्रेसिंग टेबल पर रखी थी…इसका मतलब वो इतनी छोटी ड्रेस में बिना कच्छी के ही है…मैं उसकी कच्छी को अपने हाथ में लेकर अभी कुछ देर पहले हुए दृश्य के बारे में सोचने लगा…सलोनी झुकी हुई है… उसकी ड्रेस कमर तक सिमटी है… उसके नंगे चूतड़ से अंकल का लण्ड चिपका है… जो उन्होंने लुंगी से बाहर निकाल लिया है… कितनी हिम्मत आ गई है दोनों में… दरवाजा खुला छोड़… मधु घर पर ही है… मैं भी दूर नहीं हूँ… और दोनों कैसे अपने नंगे अंगों को मिलाकर मजे ले रहे थे…अभी एक सवाल और मेरे दिमाग में आ रहा था… सलोनी ने कच्छी खुद उतारी थी… या अंकल में इतनी हिम्मत आ गई थी…ये दोनों कितना आगे बढ़ गए हैं… ये सब अभी सस्पेंस ही था…मैंने अपना कुरता पजामा… निकाल… बरमूडा पहन लिया…गर्मी बहुत थी… इसलिए अंडरवियर भी उतार दिया…मैं फिर से रसोई में चला गया…मधु खाना लगा रही थी… और सलोनी झुकी हुई कुछ कर रही थी…मेरी नजर सीधे उसके नंगे चूतड़ पर ही जाती है…उसके गोल मटोल… दूध जैसे चूतड़… खिले हुए मेरे सामने थे..केवल चूतड़ ही नहीं… उसके इस अवस्था में झुके होने से उसके चूतड़ों के दोनों भाग से… सलोनी की छोटी सी कोमल चूत भी झाँक रही थी…मैं अपने हाथ से उसके चूतड़ों को सहलाते हुए सीधे अपनी दो उंगलियाँ उसकी सुरमई चूत के छेद पर रख देता हूँ…मेरी उंगली को एक अलग सा अहसास होता है…उँगलियों पर कुछ गीलापन… जो शायद उसके चूत का रस था… पर कुछ चिपचिपा और सूखा सा रस भी लगता है…मेरे दिमाग में फितूर तो जाग ही गया था…क्या यह सूखा रस अंकल का था… क्या पता अंकल ने अपना लण्ड सलोनी की चूत के ऊपर भी घिसा हो…और उनका कुछ प्रीकम यहाँ लग गया हो…सलोनी उस समय ऐसे ही तो झुकी थी… और जहाँ तक मैं समझता हूँ… इस अवस्था में तो जरूर अंकल का लण्ड… सलोनी के चूत के छेद पर ही दस्तक दे रहा होगा…पता नहीं मैं क्या-क्या सोच रहा था… और ये सब सोचते हुए… ये सुसरा मेरा लण्ड भी खड़ा हो रहा था…क्या पता… अंकल का लण्ड ने सलोनी की चूत के ऊपर ही ऊपर घिसा था.. या कही कुछ अंदर भी किया हो…तभी सलोनी एकदम से खड़ी हो जाती है… और मधु की ओर देखते हुए- …क्या करते हो??मैं बिना शरमाये और ना सुनते हुए- …क्या हुआ जान?? यह कच्छी कब निकाल दी?सलोनी पहले तो कुछ चुप रहती है… फिर… खुद ही- …अरे नहीं… मैं तो कपड़े बदलने ही गई थी… कि तभी अंकल आ गए…मैं हँसते हुए- …हा हा… तो क्या जान… कहीं अंकल ने तो नहीं देख लिया कुछ… हा हा…मेरी बात पर एकदम से मधु भी हंस पड़ती है…सलोनी उसको गुस्से से देखती है- तू क्यों हंस रही है… और हटो अब आप… मैं आती हूँ… आप बैठो… पहले खाना खा लेते हैं…और बिना कुछ कहे वो बैडरूम में चली जाती है…हम दोनों को ही उसकी इस नखरीली अदा पर हंसी आ रही थी…मैंने देखा मधु मेरे बरमुडे को ध्यान से देख रही है…कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com
मेरी चालू बीवी-27
इमरान
14 Nov 2011 को प्रकाशित
कहानी सुनें
ऑडियो प्लेयर (Play Audio)
स्वर: लोड हो रहा है...
0:00
0:00
कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)
श्रृंखला
कहानी श्रृंखला (STORY SERIES)
मेरी चालू बीवी
कुल भाग: 106
भाग 10
भाग 10: पढ़ें
भाग 11
भाग 11: पढ़ें
भाग 12
भाग 12: पढ़ें
भाग 13
भाग 13: पढ़ें
भाग 14
भाग 14: पढ़ें
भाग 15
भाग 15: पढ़ें
भाग 16
भाग 16: पढ़ें
भाग 17
भाग 17: पढ़ें
भाग 18
भाग 18: पढ़ें
भाग 19
भाग 19: पढ़ें
भाग 20
भाग 20: पढ़ें
भाग 21
भाग 21: पढ़ें
भाग 22
भाग 22: पढ़ें
भाग 23
भाग 23: पढ़ें
भाग 24
भाग 24: पढ़ें
भाग 25
भाग 25: पढ़ें
भाग 26
भाग 26: पढ़ें
भाग 27
भाग 27: पढ़ें
भाग 28
भाग 28: पढ़ें
भाग 29
भाग 29: पढ़ें
भाग 33
भाग 33: पढ़ें
भाग 34
भाग 34: पढ़ें
भाग 36
भाग 36: पढ़ें
भाग 37
भाग 37: पढ़ें
भाग 38
भाग 38: पढ़ें
भाग 39
भाग 39: पढ़ें
भाग 40
भाग 40: पढ़ें
भाग 41
भाग 41: पढ़ें
भाग 42
भाग 42: पढ़ें
भाग 43
भाग 43: पढ़ें
भाग 44
भाग 44: पढ़ें
भाग 45
भाग 45: पढ़ें
भाग 46
भाग 46: पढ़ें
भाग 47
भाग 47: पढ़ें
भाग 48
भाग 48: पढ़ें
भाग 49
भाग 49: पढ़ें
भाग 50
भाग 50: पढ़ें
भाग 51
भाग 51: पढ़ें
भाग 52
भाग 52: पढ़ें
भाग 53
भाग 53: पढ़ें
भाग 54
भाग 54: पढ़ें
भाग 55
भाग 55: पढ़ें
भाग 56
भाग 56: पढ़ें
भाग 57
भाग 57: पढ़ें
भाग 58
भाग 58: पढ़ें
भाग 59
भाग 59: पढ़ें
भाग 60
भाग 60: पढ़ें
भाग 61
भाग 61: पढ़ें
भाग 62
भाग 62: पढ़ें
भाग 63
भाग 63: पढ़ें
भाग 64
भाग 64: पढ़ें
भाग 65
भाग 65: पढ़ें
भाग 66
भाग 66: पढ़ें
भाग 67
भाग 67: पढ़ें
भाग 68
भाग 68: पढ़ें
भाग 69
भाग 69: पढ़ें
भाग 70
भाग 70: पढ़ें
भाग 71
भाग 71: पढ़ें
भाग 72
भाग 72: पढ़ें
भाग 73
भाग 73: पढ़ें
भाग 74
भाग 74: पढ़ें
भाग 75
भाग 75: पढ़ें
भाग 77
भाग 77: पढ़ें
भाग 78
भाग 78: पढ़ें
भाग 79
भाग 79: पढ़ें
भाग 80
भाग 80: पढ़ें
भाग 81
भाग 81: पढ़ें
भाग 82
भाग 82: पढ़ें
भाग 83
भाग 83: पढ़ें
भाग 84
भाग 84: पढ़ें
भाग 85
भाग 85: पढ़ें
भाग 86
भाग 86: पढ़ें
भाग 87
भाग 87: पढ़ें
भाग 88
भाग 88: पढ़ें
भाग 89
भाग 89: पढ़ें
भाग 92
भाग 92: पढ़ें
भाग 93
भाग 93: पढ़ें
भाग 94
भाग 94: पढ़ें
भाग 95
भाग 95: पढ़ें
भाग 96
भाग 96: पढ़ें
भाग 97
भाग 97: पढ़ें
भाग 98
भाग 98: पढ़ें
भाग 99
भाग 99: पढ़ें
भाग 100
भाग 100: पढ़ें
भाग 102
भाग 102: पढ़ें
भाग 104
भाग 104: पढ़ें
भाग 105
भाग 105: पढ़ें
भाग 106
भाग 106: पढ़ें
भाग 107
भाग 107: पढ़ें
भाग 108
भाग 108: पढ़ें
भाग 109
भाग 109: पढ़ें
भाग 110
भाग 110: पढ़ें
भाग 111
भाग 111: पढ़ें
भाग 112
भाग 112: पढ़ें
भाग 113
भाग 113: पढ़ें
भाग 114
भाग 114: पढ़ें
भाग 119
भाग 119: पढ़ें
भाग 121
भाग 121: पढ़ें
भाग 122
भाग 122: पढ़ें
भाग 123
भाग 123: पढ़ें
भाग 124
भाग 124: पढ़ें
भाग 125
भाग 125: पढ़ें
भाग 126
भाग 126: पढ़ें
भाग 127
भाग 127: पढ़ें
भाग 128
भाग 128: पढ़ें
भाग 129
भाग 129: पढ़ें
यह एक बहु-भाग कहानी है। अपनी पसंदीदा कड़ी पर जाने के लिए ऊपर क्लिक करें।
इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ
पड़ोसी
डॉक्टर ने पंडित की गांड मारी
पिछली कहानी:मेडिकल स्टूडेंट्स को गांड चुदाई का शौक
15 मिनट
881
पड़ोसी
बीवी को मालिश वाले के बड़े लंड से चुदवाया- 2
लॉन्ग डिक सेक्स कहानी में मेरी बीवी को चुदाई पसंद है पर मैं उसकी जोरदार चुदाई नहीं कर पाता. तो मैंने उसके मजे के लिए लम्बे लंड वाले की तलाश शुरू की.
17 मिनट
1,203
पड़ोसी
पति को धोखा देकर यार से चुदी होटल में
माय हॉट पुसी स्टोरी में मैं अपने पड़ोस के लड़के को पसंद करती थी. मैं उसके जवान लंड का मजा लेना चाहती थी. मैंने उसका लंड अपनी चूत में कैसे लिया?
9 मिनट
845
पाठकों की राय
1 टिप्पणी
s
spsingh55555
2 weeks agoबहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।