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मेरा गुप्त जीवन- 112

यश देव

13 Mar 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 112
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अगले दिन पापा ने मुझको नाश्ते के टेबल पर बताया- बॉम्बे से फिल्म वाले आने वाले हैं और वो यहाँ गाँव में फिल्म की शूटिंग करने आ रहे हैं, उस फ़िल्म का फ़ाइनेंस भी हम कर रहे हैं।मैं एकदम से खुश हो गया और बड़े ही जोश में पूछने लगा- पापा कौन सी फिल्म की शूटिंग करेंगे वो यहाँ?पापा बोले- वो आज लंच से पहले आ रहे हैं सो यह सारी बात उन से ही पूछ लेना।

लंच से पहले ही दो बड़ी बड़ी कारें हमारी हवेली के अंदर आकर रुकी और मैंने और पापा ने फिल्म यूनिट का स्वागत किया और उनको बैठक में ले आए।आने वालों में एक तो अधेड़ उम्र वाले सज्जन थे और दो चालीस की उम्र वाले आदमी थे और साथ ही उन में दो बड़ी खूबसूरत औरतें भी थी।उनको देख कर मेरे मन में कोई ख़ास उत्सुकता तो नहीं उत्पन्न हुई और ना ही उन फ़िल्मी सुंदरियों को देख कर मेरे मन में कोई हलचल उत्पन्न हुई।

बातों बातों में पता चला कि ये दोनों औरतें फिल्म में होने वाले डांस का सीन नदी किनारे करेंगी।

फ़िल्म यूनिट को एक तो अपने स्टाफ़ के रहने की समस्या थी, दूसरे उनको फ़िल्मी डांस के लिए उपयुक्त स्थान को ढूंढना था।जो थोड़े बज़ुर्ग से दिखने वाले सज्जन थे, वो ही पापा से बात कर रहे थे।

नाश्ता पानी के बाद पापा उनको अपनी कार में गाँव घुमाने के लिए ले गए।अगले दिन यह तय हुआ कि फिल्म यूनिट कॉटेज में रहेगी और फिल्म कम्पनी कॉटेज और गाँव की भूमि का इस्तेमाल करेगी और उस का तयशुदा पैसा भी देगी ज़मींदार साहब को!उनको बावर्ची और बर्तन इत्यादि दिलवा दिए जाएंगे ताकि वो अपनी पसन्द का खाना खुद बनवा सकें।

पापा ने मुझसे कहा कि मैं उनको समस्त सुविधाएँ देने का जिम्मा अपने ऊपर ले लूँ।उनमें से जो एक हीरोइन जैसी सुंदर स्त्री थी मुझ को उसे रहने की जगाह दिखानी थी तो मैं उनकी बड़ी गाड़ी में उनको लेकर कॉटेज में गया और वहाँ की सारी सुविधाएँ उनको दिखा दी।कमरे तो केवल 5 ही थे लेकिन उनके साथ टॉयलेट बहुत काम के थे उनके लिये।उस सुन्दरी ने अपना नाम मधु बताया था और देखने में वो खासी खूबसूरत लग रही थी और उसने बड़े ही फैशनेबुल कपड़े पहन रखे थ।

जब वो हमारी कॉटेज के मुख्य बैडरूम में पहुँचे तो वो कहने लगी कि वो थोड़ा आराम करना चाहती है और उसको प्यास भी लगी है।मैं झट से उनके लिए कोकाकोला की बोतल खोल कर ले आया और उसको देख कर वो बेहद खुश हुई।

फिर उन्होंने मुझ से पूछा- तुम्हारा नाम क्या है?मैंने मुस्कराते हुए कहा- मेरा नाम सोमेश्वर है लेकिन सब मुझ को प्यार से सोमू बुलाते हैं और आप भी मुझको इसी नाम से बुला सकती हैं।

मधु बोली- क्या कॉलेज में पढ़ते हो तुम?मैं बोला- जी हाँ मैं लखनऊ में कॉलेज में फर्स्ट ईयर इंटर में पढ़ता हूँ और वहीं ही रहता हूँ।मधु बोली- अच्छा है! तुम जानते हो तुम काफी हैंडसम दिखते हो बिलकुल फिल्म के हीरो के माफिक।मैं बोला- थैंक्यू मधु आंटी लेकिन मेरी सूरत कोई ख़ास नहीं है ना!मधु बोली- मुझ को आंटी मत कहो ना प्लीज। तुम मुझको मधु के नाम से बुला सकते हो!

मैं बोला- आप इस फिल्म की हिरोइन हैं क्या?मधु बोली- नहीं रे, मैं तो सिर्फ फिल्म की डांस डायरेक्टर हूँ. कल जो लड़कियाँ डांस करने के लिए आ रही हैं मैं उनको डांस के स्टेप्स सिखाऊँगी और कैसे डांस करना है यह बताऊँगी। तुमको डांस करना आता है क्या?मैं बोला- नहीं मैडम जी, मैंने कभी डांस नहीं किया।मधु बोली- अरे सोमू, कुछ भी मुश्किल नहीं है, मैं सिखा दूंगी तुमको, इधर आओ मैं तुमको बताती हूँ कुछ स्टेप्स।

मधु मैडम ने मेरा हाथ अपने हाथ में पकड़ा और दूसरा हाथ मेरी कमर में डाला और मुझको कमरे में गोल गोल घुमाने लगी और इसी चक्कर में मेरा हाथ दो तीन बार उसके गोल उभरे हुए स्तनों पर जा लगा और दो तीन बार उसका भी हाथ मेरे लंड पर लग था।

मैडम की हाइट होगी 5.6 फ़ीट थी और मेरी हाइट जो 5 .11 फ़ीट से बड़ी मैच कर रही थी।हम दोनों थोड़ी देर हाथों में हाथ डाले कमरे के चारों तरफ चक्कर काटते रहे और मैंने मौका देख कर उसके गोल चूतड़ों पर भी दो बार हाथ लगा दिया।फिर चक्कर लगाते हुए मैडम का पैर मेरे पैरों से उलझा और वो गिरने लगी तो मैंने उसको अपनी बाहों में संभाल लिया और उस को अपनी छाती से लगा लिया।

कुछ समय वो मेरी छाती से ही चिपकी रही और मैं भी उसके सुडोल मुम्मों का आनन्द लूटता रहा, फिर वो मुझसे अलग हुई और उसने अपने होटों को मेरे होटों पर रख कर एक हलकी सी चुम्मी कर दी।मैं भी कम्मो का सिखाया हुआ शिष्य था, झट से मैंने उसको अपनी बाँहों में भींच लिया और उसके गर्म लबों पर कई चुम्मियाँ कर दीं।

इस जफ्फी के दौरान मेरा खड़ा लौड़ा उसकी साड़ी के बाहर से उसकी चूत पर लग रहा था और तभी मैंने महसूस किया कि उसका एक हाथ मेरे लंड के साथ पैंट के ऊपर से खेल रहा था।उसने मेरी तरफ देखा एक भेद भरी नज़र से और मैंने भी उसको एक हल्की सी आँख मार दी।

अब मैंने उसको अपनी बाहों में लेकर बहुत ज़ोर से जफ्फी डाल दी और फिर उसकी साड़ी को उतारने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तब वो बोली- अरे कमरे के दरवाजे को तो बंद कर लो ना प्लीज।

मैंने कहा- मैडम जी, फ़िक्र ना करें, बाहर चौकीदार है ना… वो किसी को अंदर नहीं आने देगा।फिर भी मैडम की तसल्ली के लिए मैंने कमरे को बंद करके कुण्डी लगा दी और अब मैंने मैडम की साड़ी की तरफ हाथ बढ़ाया।मैडम स्वयं ही अपनी साड़ी उतारने लगी और मैं एक फैशनेबुल लेडी को कपड़े उतारने का जलवा देखने लगा।

मैडम सच में फ़िल्मी स्टाइल में अपनी साड़ी उतारने लगी, थोड़ी सी साड़ी खोली और फिर एक चक्कर कमरे का और मेरे इर्दगिर्द लगाया और फिर उसने सारी साड़ी उतार दी और उसी कलर का सिल्क का पेटीकोट सामने आ गया जो बेहद सेक्सी लग रहा था।फिर उसका एक हाथ अपने ब्लाउज की तरफ बढ़ा और उसने मुझको आँख से इशारा किया मैं भी अपने कपड़े उतारने शुरू करूँ।

मैडम का ब्लाउज़ और मेरी कमीज एक साथ उतरे और फिर उसने अपनी रेशमी ब्रा के हुक्स को खोलने के लिए हाथ बढ़ाया तो मैंने अपनी बनियान उतार दी और जैसे ही मेरी छाती नंगी हुई वैसे ही मैडम की ब्रा खुल कर नीचे गिरी और उसके मुम्मे उछल कर बाहर आ गए।

जैसे ही उसका पेटीकोट नीचे गिरा वैसे ही मेरी पैंट नीचे गिरी और उसने मेरे अंडरवियर के नीचे बने टैंट को देखा और कहने लगी- उफ़्फ़ सोमू, क्या चीज़ है यह!और मैंने देखा कि उसने भी सिल्क की पैंटी पहन रखी थी।अब मैंने कहा- आप मेरा अंडरवियर उतारो और मैं आपकी पैंटी उतारता हूँ, क्यों ठीक है ना?मैडम बोली- ठीक है, आओ मेरे पास!

मैं मैडम के पास गया और पहले उसकी पैंटी उतार दी और फिर मैं मैडम के सामने खड़ा हो गया और वो मेर अंडरवियर उतारने लगी और जैसे ही उसने अंडरवियर को नीचे खींचा, मेरा नाग नुमा लंड उछल कर मैडम की तरफ लपका लेकिन मैडम भी चतुर थी सो उस ने झट अपना चेहरा पीछे कर लिया।

यह देख कर मैडम बहुत ज़ोर से हंस पड़ी और कहने लगी- सोमू लाल मैं तुम्हारी चाल समझ गई थी जब मैंने तुम्हारे टेंट का साइज देखा तो यह बात साफ़ हो गई थी कि तुम एक नागपाल हो और यह मैंने गेस कर लिया था।मैं थोड़ा शर्मिंदा हुआ और थोड़ा हिचकते हुए बोला- यह बात नहीं है मैडम जी, लेकिन क्या करूँ जब कोई बेध्यानी से नाग का ढक्कन खोलता है तो उसको उसका परिणाम तो भुगतना पड़ता है न!

अब मैडम खड़ी हुई तो यह देख कर मैं हैरान रह गया कि उसकी चूत पर काले बालों की लटें छाई हुई थी जबकि मुझको उम्मीद थी कि वो भी सफाचट चूत वाली होगी क्योंकि वो इतनी फैशनेबुल औरत है।मैंने उससे पूछ ही लिया तो उसने जवाब में कहा- मेरे पति को सफाचट पुसी नहीं अच्छी लगती क्यूंकि वो मानते हैं सफाचट पुसी रखने वाली औरतें और लड़कियाँ सिर्फ रंडियों के समान होती हैं।

मैं वहीं बैठ गया और उसकी चूत में मुंह डाल कर उसकी चूत को चूसने लगा, धीरे धीरे जीभ को उसकी भग पर रख कर हल्के हल्के चूसने लगा और यह मैडम को इतना पसंद आया कि वो मुझको उठा कर बेड पर ले गई और मैं वहाँ लेट कर उसके मुम्मों को बड़ी ही बेसब्री से चूसने लगा।फिर उसने मेरे लौड़े को खींचना शुरू कर दिया और तब मैंने उसकी टांगें चौड़ी कर उसके ऊपर से लंड लाल को लटों से भरी चूत के मुंह पर रख दिया और उसकी एकदम गीली चूत के अंदर धकेल दिया।उसकी चूत और उसके पेट पर झुरियाँ ना होने से मैं समझ गया कि वो अभी तक माँ नहीं बनी थी और लंड उसकी बहुत ही टाइट चूत में एकदम से दूर तक चला गया।

अब मैं मैडम के अंदर से पूरा लंड निकाल कर फिर पूरा का पूरा अंदर डाल कर चोदने लगा और हर बार मैडम अपनी कमर उठा कर लंड का स्वागत करती थी और फिर हम दोनों एक दूसरे को खूब एन्जॉय करते हुए चोदने लगे।जीवन में पहली बार एक बहुत ही फैशनेबुल औरत को चोदने का मौका मिला था तो मैं पूरी कोशिश में था कि मैडम को किसी नए ढंग से चोदूं लेकिन मुझको समझ नहीं आ रहा था कि वो नया ढंग क्या हो सकता है।

मैं अब मैडम को निहायत ही कामातुर हुआ चोद रहा था, कभी उसके गोल मुम्मों को चूसता था और कभी उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर धक्के मार रहा था।थोड़ी देर में मधु मैडम झड़ने के करीब पहुँच गई थी, उसकी आँखें मुंदी हुई थी, होंट खुले हुए थे, सांसें तेज़ चल रही थी और मैं पूरे जोश और खरोश से लंड के धक्के मार रहा था।

और फिर मेरे लंड ने महसूस किया कि उसकी चूत में सिकुड़न आरम्भ हो गई और उसकी चूत में से हल्की सी जलधारा बहनी शुरू हो गयी थी।अब मैंने मैडम की टांगों को हवा में कर दिया, सरपट धक्कों की स्पीड चला दी और कुछ ही क्षणों में मैडम ने मुझको अपनी टांगों में बाँध लिया, उसकी कमर ज़ोर ज़ोर से कांपने लगी और मैडम ने मुझको कस कर अपनी छाती से बाँध लिया।थोड़ी देर हम दोनों एकदम से शांत हुए एक दूसरे से जुड़े हुए पड़े रहे और फिर मैडम अपनी टांगें सीधी करने लगी और मैं एक गहन चुम्बन मैडम के लबों पर देकर बेड पर लेट गया।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 144
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भाग 96
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भाग 102
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

समर प्रताप सिंह

2 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

अमित शर्मा, जयपुर

3 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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