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नौकर-नौकरानी पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 697 बार

मेरा गुप्त जीवन -35

यश देव

08 Feb 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -35
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कम्मो की दर्द भरी कहानी सुन कर हम बहुत द्रवित हो गए लेकिन जो हो चुका था उसको तो बदला नहीं जा सकता ना, मेरे कहने पर पारो लेमन वाली बोतल उठा लाई और सबने ठंडी बोतल पी, पीने के बाद मन में कुछ शांति आई।

मैंने वैसे ही कम्मो से पूछा कि उसकी सहेली चंचल का क्या हाल है अब, वो कहाँ रहती है आजकल।कम्मो हंसने लगी और बोली- वाह छोटे मालिक, चंचल का नाम सुन कर आपके लंड के मुंह में पानी भर आया?मैं भी हंस दिया और बोला- नहीं ऐसा नहीं है लेकिन वैसे ही उसका हाल जानने के लिए मैंने पूछा था।कम्मो बोली- छोटे मालिक, आप सुन कर खुश होंगे, वह आजकल यहीं रहती है अपने पति के साथ।

‘अच्छा है। तुमको मिलती होगी अक्सर?’‘हाँ, मिलती है कभी कभी, जब उस का पति घर नहीं होता। क्यों आपकी कुछ मर्ज़ी है क्या?’‘मर्ज़ी तो तुम्हारी है कम्मो, सहेली तो वो तेरी है न?’‘अच्छा अगर आपकी बहुत मर्ज़ी है तो मैं उससे पूछ देखती हूँ, अगर वो तैयार हो गई तो बुला लूंगी उसको!’

‘तेरी इच्छा है अगर तेरा दिल मानता है तो बुलाना वरना नहीं। उसके तो अभी बच्चे भी होंगे न?’‘नहीं छोटे मालिक, उसका कोई बच्चा नहीं हुआ अभी तक, उसका पति अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता है और वो यहाँ अकेली ही रहती है पति की गैरहाज़री में!’‘अच्छा तुम उससे पूछना क्या वो कुछ समय हम तीनों के साथ गुज़ारना चाहेगी? वैसे जैसे तुम ठीक समझो उससे बात कर लेना।’कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक, मैं कोशिश करती हूँ।

अभी काफी रात बाकी थी, हम तीनों फिर चुदाई में लग गए। मैं पलंग के किनारे पर बैठ गया और पहले मोटे चूतड़ वाली पारो मेरे लंड पर बैठ गई, उसने अपने हाथ से मेरे लोहे के समान लौड़े को अपनी गीली चूत में डाल दिया और मेरी गर्दन में हाथ डाल कर आगे पीछे झूलने लगी। उसके मोटे मम्मे मेरी चौड़ी छाती पर चिपक जाते थे और उसकी चूचियां मेरी छोटी चूचियों के साथ रगड़ करती हुई पारो की चूत के साथ वापस चली जाती थी।कम्मो मेरे पीछे बैठ कर मेरे अण्डों के साथ खिलवाड़ कर रही थी और पारो की गीली चूत का रस अपनी चूत पर लगा रही थी। थोड़ी देर में पारो एक ज़ोर का चूत का झटका मार कर मुझसे चिपक कर झड़ गई।

उसके झड़ते ही उसकी जगह कम्मो फ़ौरन आ गई और उसी जोश से भरी चुदाई कम्मो के साथ शुरू हो गई। वो भी थोड़ी देर में झड़ गई।क्यूंकि मेरा अभी नहीं झड़ा था तो मैं अभी खेल बंद करने के हक में नहीं था, मैंने अपनी गुरु कम्मो को लिटा कर उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी। और इतनी तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा कि कम्मो की सांस उसके गले में अटक गई।मेरी इस धक्कशाही से वह कब और कितनी बार छूटी, यह मैं नहीं जानता लेकिन अंत में जो मेरा फव्वारा छूटा, वो कम्मो की चूत की पूरी गहराई तक पहुँच गया होगा।फिर हम तीनो एक दूसरे से लिपट कर नंगे ही सो गए।

अगले दिन जब मैं कॉलेज से लौटा तो कम्मो मुस्कराती हुई आई और बोली- बधाई हो छोटे मालिक, आप का काम हो गया।मैं बोला- कौन सा काम कम्मो?कम्मो बोली- वही चंचल वाला।मैं बोला- वाह कम्मो, कमाल किया तुमने, कब आयेगी वो?कम्मो बोली- कब क्या, वो तो आई बैठी है।

मेरा मुंह हैरानगी से खुला रह गया।

तब कम्मो अंदर गई और एक अच्छी दिखने वाली औरत को साथ ले आई और बोली- छोटे मालिक, इनसे मिलो, यह है मेरी सहेली चंचल।चंचल ने बड़े प्यार से मुझ को नमस्ते की और मैंने भी उसका जवाब दिया।ध्यान से देखा, चंचल कोई 5 फ़ीट की हाइट वाली मध्यम जिस्म वाली औरत थी जिसकी उम्र होगी 22-23 साल। रंग गंदमी और शरीर भरा पूरा लेकिन पारो और कम्मो से काफी कम था, बहुत ही आकर्षक साड़ी ब्लाउज पहने थी।

मैंने कम्मो को कहा- बहुत सुन्दर है तुम्हारी सहेली।कम्मो बोली- खुशकिस्मती देखिए, इसका पति कुछ दिनों के लिए बाहर गया हुआ है काम पर! जब मैंने आपका संदेशा दिया तो फ़ौरन तैयार हो गई।मैं खुश होते हुए बोला- वाह कम्मो, तुमने तो कमाल कर दिया। यह रात रहेगी न तुम्हारे साथ?कम्मो बोली- हाँ छोटे मालिक, यह यहीं रहने के लिए तैयार है जब तक इस का पति नहीं लौट कर आता।मैं बोला- चलो अच्छा है, रात में चंचल की खातिर का इंतज़ाम कर देना, जैसे मुर्गा और आइसक्रीम मंगवा लेना। खूब जमेगी जब मिल बैठेंगे चार यार!

कम्मो और चंचल हंसती हुई चली गई।

रात को बहुत अच्छा खाना खाकर लेमन पीकर मेरे कमरे में हम इकट्ठे हुए, देखा तो पारो नहीं है। कम्मो ने बताया कि पारो की माहवारी शुरू हो चुकी है, इसलिए नहीं आई।चंचल से मैंने पूछा- कम्मो ने सारी बात बताई है या नहीं?वो बोली- मैं जानती हूँ छोटे मालिक।मैं बोला- तो ठीक है, शुरू हो जाओ फिर।

यह कह कर मैं अपने कपड़े उतारने लगा, कम्मो भी यही कर रही थी, सिर्फ चंचल कुछ नहीं कर रही थी।हम दोनों ने हैरानी से उसको देखा और एक साथ पूछा- क्या बात है, कपड़े नहीं उतार रही हो तुम?चंचल बोली- मैं पहले छोटे मालिक का मशहूर लंड देखना चाहती हूँ, सुना है बहुत लम्बा और लोहे के समान खड़ा रहता है।

मैं और कम्मो ज़ोर से हंस पड़े।फिर मैंने जल्दी से अपना पयजामा उतार दिया।मेरा वफादार लंड एकदम अकड़ा खड़ा था और सीधा चंचल की तरफ इशारा कर रहा था।

चंचल ने लंड को देखा और आगे बढ़ कर उसको अपने हाथ में पकड़ लिया, फिर उसने उसको अपने होटों से चूमा और कहने लगी- छोटे मालिक, जब तक आप मुझको माँ नहीं बनाते, आप मुझको इसी लंड से चोदते रहोगे और कभी भी चुदाई से इंकार नहीं करोगे।

मैं बोला- कम्मो ने बता ही दिया। ठीक है अगर तुम सबको वहम है कि मेरे चोदने से गाँव की औरतें माँ बन रही हैं तो मैं तुम्हारी इच्छा ज़रूर पूरी करूंगा लेकिन कोई पक्की गारंटी नहीं देता मैं!चंचल और कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक!

अब चंचल जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगी, उसके नंगी होते ही दो चीज़ें सामने आई, एक तो उसने मम्मों पर अंगिया पहन रखी थी और दूसरे उसकी चूत भी सफाचट थी, यानि कोई झांट का बाल नहीं था उस पर।

कम्मो ने पूछा- यह क्या है चंचल? बाल कहाँ गए तेरी चूत के? और यह क्या अंगिया पहन रखा है?चंचल बोली- यह सब मेरे पति की मर्ज़ी से हो रहा है, उसको चूत पर बाल अच्छे नहीं लगते और अंगिया पहनना उसको अच्छा लगता है।

मैं बोला- चलो ठीक है, जैसे इसके पति की मर्ज़ी, और यह अंगिया का क्या फ़ायदा है चंचल?चंचल बोली- छोटे मालिक, इसे पहनने से मम्मे सख्त बने रहते हैं और ढलकते नहीं जल्दी।मैं बोला- यह बात है तो फिर तो सब औरतों को ब्रा पहननी चाहये न जैसे कि शहर की लड़कियाँ और औरतें करती हैं। कल जाकर तुम अपने लिए और पारो के लिए ब्रा ले आना, चंचल को ले जाना, वो बता देगी कहाँ से अच्छी ब्रा मिलती है।

अब मैंने ध्यान से चंचल को देखा, उसका जिस्म काफी सेक्सी था, वो कद की छोटी ज़रूर थी पर सारे अंग सुन्दर और सुडौल थे। कम्मो उसको लेकर मेरे निकट आई और उसको मेरी बाँहों में धकेल दिया और बोली- नज़राना पेश है आली जा, कबूल फरमायें।

मैं भी एक्टिंग के मूड में बोला- बेगम, आपने बड़ा ही लाजवाब तौहफा दिया है हम को, बोलो इसके बदले में क्या चाहिये आपको?कम्मो बोली- कनीज़ को आपके लौड़े के दर्शन होते हैं और होते रहें हर रोज़, यही काफी है हज़ूर।मैं बोला- जाओ ऐसा ही होगा।फिर मैंने चंचल से पूछा- तुमको किस तरह की चुदवाई सबसे ज्यादा पसंद है चंचल?वो बोली- वैसे तो हर तरह की पसंद है लेकिन घोड़ी वाली बहुत ज्यादा पसंद है।

फिर मैंने चंचल के होटों को चूमना शुरू किया और साथ ही साथ ऊँगली उसकी चूत में भी डाल दी जो बेहद गीली हो रही थी। मुंह के बाद उसके मम्मों को चूमना और चूसना शुरू किया और उंगली से उसकी भग को भी रगड़ता रहा।जब वो काफी गर्म हो गई तो मैंने उसको पलंग पर घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड को उसकी चूत के ऊपर रख कर एक हल्का धक्का मारा और लंड का सर चूत के अंदर था।

कम्मो भी हमारे साथ बैठी थी और वो मेरे लंड को पकड़ कर फिर से चंचल की चूत पर रख कर रगड़ने लगी।अब फिर मैंने हल्का धक्का मार दिया और लंड अब पूरा अंदर चला गया। कुछ देर मैंने लंड को उसकी चूत में बिना हिले डुले रखे रखा और कम्मो साइड से चंचल के मम्मों को रगड़ने लगी।

फिर कम्मो ने मेरे चूतड़ों पर एक हल्की सी थपकी दी जैसे घोड़े को तेज़ भागने के लिए देते हैं, मैं इशारा समझ गया और अपना लंड को सरपट दौड़ाने लगा। चंचल अपना सर इधर उधर कर रही थी और मेरा लंड बेहद तेज़ी से दौड़ता हुआ अपनी मंज़िल की तरफ भागने लगा।

कम्मो मेरे पीछे बैठ गई थी और अपने मम्मे मेरी पीठ से रगड़ रही थी जिससे मेरा जोश और भी बढ़ रहा था।इस दौड़ का पहला शिकार हुआ जब चंचल छूटने के बाद रुकने का इशारा करने लगी लेकिन मैं अपने सरपट दौड़ते हुए लौड़े-घोड़े को कैसे रोकता, वो तो बेलगाम हो गया था और एक इंजन की तरह अंदर बाहर हो रहा था।थोड़ी देर ऐसे ही दौड़ चली और फिर चंचल छूट कर अबकी बार लेटघोड़ी ही गई।

मुझको जबरन रूकना पड़ा, तब तक कम्मो अपनी चूत को घोड़ी बन कर आगे पेश कर रही थी तो मैंने उस गिरी हुई घोड़ी से अपना लंड निकाला और दूसरी में डाल दिया।दूसरी फ़ुद्दी के अंदर गरम जलती हुई लोहे की सलाख गई तो वो भी भागने लगी तेज़ी से! मेरे जैसा शाहसवार नई घोड़ी की दुलत्ती चाल से बेहद खुश हुआ और आराम से नई घोड़ी को चोदने में मग्न हो गया।कभी तेज़ और कभी धीरे चाल से कम्मो को भी हिनहिनाने पर मजबूर कर दिया, उसके गोल और मोटे चूतड़ मुझको इस कदर भा गए कि बार बार उन पर हाथ फेरते हुए उसका होंसला बढ़ाने की कोशशि करने लगा।

उधर देखा कि चंचल भी फिर गांड उठा कर तैयार हो रही है तो मैंने कम्मो को धक्के तेज़ कर दिए और 5 मिन्ट के अंदर ही उसका भी छूटा दिया।जब वो लेट गई तो मैंने अपनी गरम सलाख कम्मो की चूत से निकाल कर चंचल की छोटी लेकिन गोल गांड में डाल दी।दौड़ फिर शुरू हो गयी चंचल के साथ और 10 मिन्ट की तेज़ और आहिस्ता चुदाई के बाद जब वो झड़ गई तो मैंने भी लंड उसकी चूत की गहराई में ले जाकर ज़ोरदार हुंकार भर कर फव्वारा को छोड़ दिया और खुद भी उस लेटी हुई चंचल पर पसर गया।हम दोनों के ऊपर कम्मो भी आकर पसर गई और अच्छी खासी सैंडविच बन गई हमारी।

हम तीनों काफी देर ऐसे ही लेटे रहे और फिर सीधे हो कर लेट गए। कम्मो का एक हाथ मेरे लंड पर था और दूसरा चंचल की सफाचट चूत के ऊपर थिरक रहा था।

मेरे भी हाथ इसी तरह दोनों की चूत और मम्मों के साथ खेल रहे थे, चंचल की चूत से अभी भी मेरा वीर्य धीरे धीरे निकल रहा था।इस तरफ मैंने कम्मो का ध्यान मोड़ा और इशारा किया कि चंचल की चूत को ऊपर करो!वो झट समझ गई और उसने चंचल की चूत के नीचे एक तकिया रख दिया जिससे वीर्य का निकलना बंद हो गया।

चंचल अभी 2-3 बार ही छूटी थी तो कम्मो ने उससे पूछा- और लंड की इच्छा है तो बोलो?चंचल ने हामी में सर हिला दिया और वो खुद ही मेरे खड़े लंड के साथ खेलने लगी, मैं भी उसकी चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भगनासा को सहला रहा था।

तब वो उठी और मेरे खड़े लंड के ऊपर बैठ गई, जब पूरा लंड अंदर चला गया तो उसने झुक कर मुझको होटों पर जोदार चूमा, मैं भी उसके गोल और सॉलिड बूब्स के साथ खेलता रहा।हमारी दोबारा शुरू हुई जंग में कम्मो हम दोनों का पूरा साथ दे रही थी, उसकी हाथ की ऊँगली चंचल की गांड में घुसी हुई थी और दूसरी मेरी गांड में थी।

चुदाई की स्पीड तो चंचल के हाथ में थी तो मैं चैन से लेटा रहा। चंचल कभी तेज़ और कभी धीरे धक्के मार रही थी, हर धक्के का जवाब मैं कमर उठा कर दे रहा था।

अब उसकी चूत में से ‘फिच फिच’ की आवाज़ें आने लगी और उसकी चूत का पानी मेरे पेट पर गिरने लगा। उसकी चूत से निकल रही सफ़ेद क्रीम से मेरा लंड एकदम सफेद हो गया।

फिर चंचल ने आँखें बंद कर ली और ऊपर नीचे होने की स्पीड एकदम तेज़ कर दी। मैं और कम्मो समझ गए कि चंचल अब झड़ने वाली है, मैंने अपने दोनों हाथ चंचल के उचकते चूतड़ों के नीचे रख दिए और खुद भी नीचे से ज़ोरदार धक्के मार रहा था।

चंचल एक दो मिन्ट में पूरी तरह फिर झड़ गई और मेरे ऊपर तक कर लेट गई।अभी भी उसका शरीर उसके छूटने के कारण कांप रहा था। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में ही था।तब वो धीरे से मेरे ऊपर से हट कर बिस्तर पर लेट गई, फिर उसने आँखें खोल कर मुझको विस्मय से देखा और बोली- वाह छोटे मालिक, आप तो कमाल के हैं। अभी तो ठीक से मूंछ और दाढ़ी भी नहीं निकली और आप तो सेक्स के चैंपियन बने जा रहे हैं?

मैं कुछ कह नहीं सका, बस ज़रा मुस्करा भर दिया और बोला- यह सब तेरी सहेली कम्मो का कमाल है, मेरा इसमें कुछ नहीं। वही मेरी गुरु है और वही मेरी सही मायनो में मालिक है।

हम सब बहुत हँसे और फिर हम एक दूसरे के साथ लिपट कर सो गए।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 144
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भाग 2
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भाग 3
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भाग 4
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भाग 5
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भाग 6
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भाग 7
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भाग 8
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भाग 9
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भाग 10
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भाग 12
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भाग 16
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भाग 49
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भाग 83
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भाग 84
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भाग 85
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भाग 86
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भाग 90
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भाग 91
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भाग 92
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भाग 94
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भाग 96
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भाग 97
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भाग 102
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भाग 105
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भाग 109
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भाग 111
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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अखिल राजपूत

2 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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