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मेरा गुप्त जीवन -62

यश देव

22 Feb 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -62
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दो दिन बाद जब मैं कॉलेज से घर आया तो कम्मो ने बताया- सुमी और शांति आज फिर आने वाली हैं..मैं बोला- ठीक है मैं तब तक खाना खा लेता हूँ, तुम ने उनको सारी बात समझा दी है न?कम्मो बोली- बिल्कुल समझा दिया है। आज मैंने आपके लिए बकरे के पाये का सूप बनवाया है औए साथ में ही गुर्दे कपूरे की करी भी बनवा दी है।मैं बोला- पाये का सूप? उफ्फ, वो मैं कैसे पियूँगा कम्मो रानी, मैंने पहले कभी पिया ही नहीं न!कम्मो बोली- छोटे मालिक पाये का सूप तो आपको पीना पड़ेगा, आप उसको चखिए तो सही, थोड़ा पीजिये तो सही और फिर देखिये तो सही कम्मो का कमाल।

तभी पारो खाना ले आई।सूप का कटोरा सबसे पहले मेरे सामने रखा गया, मैंने भी नाक बंद कर के एक चम्मच सूप पिया और पीते ही आनन्द विभोर हो गया और चिल्लाया- यह होता है पाये का सूप? पहले बताना था… यह तो शोरबा-ऐ-वाजिदअलीशाह है और यह तो हमने गाँव में कई बार पिया है।

फिर खाना खाकर मैं थोड़ा आराम करने के लिए अपने कमरे में चला गया और ना जाने कब मेरी नींद लग गई।

जब कम्मो ने जगाया तो सुमी मेरे ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर डाल कर हल्के हल्के ऊपर नीचे हो रही थी। सुमी एकदम नंगी थी और मैंने भी जब अपने को देखा तो मैं भी नंगा था।इधर उधर देखा तो कम्मो भी नंगी और साथ ही शांति भी पूरी नंगी थी।

जब कम्मो ने देखा कि मैं जग गया हूँ तो वो मेरे पास आई और बोली- सॉरी छोटे मालिक, आप सो रहे थे और आपका एकदम खड़ा था, तो हमने सोचा कि आप को जगा देते हैं लेकिन सुमी जी बोली कि आपका चोदन कर देते हैं तो हम सबने आपको एक एक बार चोद रखा है।मैं बोला- उफ़ मेरी माँ, तभी मैं कहूँ कि यह सपने में मुझ को परियां क्यों चोद रहीं हैं? मुझको क्या मालूम था कि सच में मेरे ऊपर परियां चढ़ी बैठी हैं।

यह सुन कर सब हंस पड़ी। अब सुमी ने तेज़ी से मुझको चोदना शुरू कर दिया था और उसके चेहरे से लग रहा था कि उसका जल्दी ही छूटने वाला है, मैंने भी नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिये थे और मेरे ज़ोर के धक्कों से सुमी जल्दी ही स्खलित हो गई।

अब कम्मो ने कहा- सुमी को घोड़ी बना कर चोदो!और वो झट से घोड़ी बन गई, मैंने भी अपनी पोजीशन लेकर उसकी चूत के मुख पर लंड रख दिया, गीली उबलती हुई चूत में अपना लोहे के समान कड़ा लंड धीरे धीरे से चूत में डालने लगा।मुझको ऐसा लग रहा था कि आज मेरा लंड कुछ ज़्यादा मोटा और लम्बा हो गया है।फिर मैंने अपना पूरा ध्यान सुमी की चुदाई में लगा दिया।

कम्मो पास में खड़ी होकर सुमी के मम्मों का चूषण और मर्दन कर रही थी और साथ ही हाथ से उसकी भग को भी सहला रही थी।इस दोहरे हमले सुमी ज़्यादा देर सहन नहीं कर सकी और 5-6 मिन्ट में ही उसका छूट गया।

अब कम्मो ने मुझको इशारा किया कि मैं भी अपना छूटा दूँ।अब मेरे धक्के लम्बे और गहरे होने लगे, मैंने कस कर सुमी की गांड को अपने लौड़े के साथ जोड़ दिया और तेज़ धक्कों की बौछार शुरू कर दी, हर धक्के में लंड के साथ यह महसूस करने की कोशिश कर रहा था कि सुमी की बच्चेदानी का मुंह किस तरफ है।जब मुझ बहुत को थोड़ा आभास हो गया तो मैंने अपने लंड को उसी दिशा में रखा ताकि जब छूटे तो वीर्य सीधे बच्चेदानी के मुंह के अंदर जाए।अब जब मुझको यकीन हो गया तो मैंने लंड का फव्वारा छोड़ दिया और वो सीधा बच्चेदानी के अंदर चला गया, ऐसा मुझको लगा।कम्मो ने सुम्मी की टांगें एकदम ऊपर कर दीं और उसके चूतड़ों के नीचे एक मोटा तकिया रख दिया था।

तब तक मैंने शांति को घेर लिया और उसकी एकदम कसी चूत जो गीली हो रही थी, मैंने ऊँगली से भग को मसलना शुरू कर दिया, उसके छोटे लेकिन रसीले होटों को भी चूमने लगा।

फिर मैंने उसके चूतड़ों के नीचे हाथ रख कर उसको ऊपर उठा लिया और अपने तने हुए लौड़े को चूत के मुंह पर रख कर ज़ोर का एक धक्का मारा और चूत की कसावट के बावजूद लौड़ा एकदम अंदर हो गया।अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और शांति भी उसी तरह जवाब देने लगी और 5 मिन्ट में वो भी झड़ गई, झड़ते हुए उसने मुझको कस कर अपने सीने से लगा लिया।उसकी रसीली चूत से निकला सारा माल मेरे हाथों में गिरा हुआ था और जब मैंने उसको नीचे उतारा तो वो सारा का सारा रस उस के मम्मों पर मल दिया और कुछ उसके मोटे गोल चूतड़ों पर लगा दिया।

सुमी ने उठ कर मुझ को गले लगा लिया और ज़ोरदार चुम्मी मेरे होटों पर जड़ दी। मैंने भी उसके मम्मों के चुचूक को बारी बारी से चूसा।तब सुमी बोली- मज़ा आ गया आज तो चुदाई का! आज तुम्हारा लंड भी कुछ ज़्यादा लम्बा और मोटा लगा मुझको! क्यों शांति?शांति बोली- हाँ, मुझ को भी लगा कि आज सोमु जी का हथियार कुछ बदला हुआ है, ज़्यादा मोटा और लम्बा है आज शायद।

कम्मो मुस्कराते हुए बोली- हाँ, वो तो होना ही था, आज छोटे मालिक को स्पेशल डाइट जो खिलाई है मैंने ताकि वो सुमी जी का गर्भाधान कर सके। चलो नाप लेते हैं सब के सामने।

यह कह कर वो इंच टेप ले आई और मेरे लंड को नापने लगी।नाप लेने के बाद वो बोली- सुमी जी, आप नापिये मुझसे शायद कुछ गलती हो रही है?

अब सुमी मेरे लंड का नाप लेने लगी और बोली- हाय राम, यह तो पूरे 8 इंच लम्बा निकल रहा है और 4 इंच मोटा है. उफ़ क्या मैं 8 इंच अंदर ले गई थी?कम्मो बोली- आपके पति ठाकुर साहिब का कितना बड़ा है?सुमी बोली- वो तो 5-6 इंच लम्बा है और मोटा भी कम है।

कम्मो बोली- क्या आप अपने पति की चुदाई से खुश हो जाती हैं यानि क्या वो आपका छूटा देते हैं?सुमी बोली- कभी कभी मैं छुट जाती हूँ लेकिन ज़्यादा टाइम वो बहुत जल्दी करते हैं, तो मैं रह जाती हूँ।मैं बोला- फिर कैसे काम चलाती हो आप?सुमी बोली- वो क्या करें, मज़बूरी मं ऊँगली से या फिर शांति और मैं एक दूसरी का छूटा देती हैं।मैं बोला- वो कैसे?

शांति बोली- हम एक दूसरी को काफ़ी चूमना चाटना करती हैं जिससे हम दोनों का काम हो जाता है।मैं बोला- अच्छा शांति, तुम्हारा पति कैसे चोदता था तुमको? तुम्हारा छुटा देता था कि या फिर वो बीच में ही छोड़ देता था?शांति उदास हो कर बोली- वैसे हमारे मर्दों को चोदना आता ही नहीं, ख़ास तौर पर गाँव वालों को! बहुत सारे मर्दों को यह पता ही नहीं कि स्त्री का भी छूटता है, वो सोचते हैं कि लंड चूत में डाल ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने से ही औरत खुश हो जाती है और बच्चा पैदा हो जाता है।

सुमी बोली- शांति ठीक कह रही है, आमतौर से मर्दों में यह भ्रान्ति है कि औरत का छूटना ज़रूरी नहीं बच्चा पैदा करने के लिए! और वो अक्सर कुछ ज़ोर के धक्के चूत में मार कर मूंछों को ताव देते रहते हैं कि मेरे जैसा मर्द है ही कोई नहीं दुनिया में! लेकिन सोमू, तुमको बढ़िया चुदाई किसने सिखाई?मैं हंस कर बोला- मेरी गुरु कम्मो रानी है और कोई नहीं। वो मुझको ठीक ढंग से सिखा रही है।

कम्मो बोली- जब मैं छोटे मालिक के घर आई थी तो इनकी देखभाल करने के लिए मुझको नियुक्त किया गया था और मैंने पूरी कोशिश की छोटे मालिक को पूरी ट्रेनिंग दूँ जिससे वो आगे चल कर कोई तकलीफ न उठा पाएं। मैं एक पूरी तरह से ट्रेन्ड नर्स और दाई हूँ। अब आप दोनों का भी नाप ले लेती हूँ।

यह कह कर कम्मो इंच टेप और मुझको इशारा किया और मैं कॉपी में इनका नाम लिख कर नाप नोट करने लगा।पहले सुमी जी का नाप निकला- 36-30-40 और शांति का नाप निकला- 32-26-34दोनों ही बहुत सेक्सी थीं। लेकिन सुमी के मोटे चूतड़ों से मैं बहुत ही प्रभावित हुआ था।

थोड़ी देर बाद दोनों ही अपनी कोठी चली गई।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 144
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भाग 102
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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

गुड़िया

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

नन्दिनी

3 weeks ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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