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नौकर-नौकरानी पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 1,203 बार

मेरा गुप्त जीवन -52

यश देव

25 Oct 2025 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -52
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अगले दिन नैनीताल से चल कर हम शाम को लखनऊ पहुँच गए।जब मैं कोठी पहुंचा तो शाम हो चली थी, कोठी के गेट पर राम लाल चौकीदार ने सलाम किया और पूछा- कैसा रहा नैनीताल?राम लाल ने बताया कि सब ठीक चल रहा है।अंदर से कम्मो ने मुझको पहले ही देख लिया था, वो मेरा बैग उठा कर मेरे कमरे में आ गई।

जैसे ही उसने बैग रखा, मैंने उसको बाहों में भर लिया और ज़ोरदार चुम्मी उसके होटों पर दी।कम्मो ने भी मुझको ज़ोरदार किस की और ज़ोर की जफ़्फ़ी डाली, बोली- हम सब आपको बहुत याद कर रहे थे, आपका टूर कैसा रहा?मैं बोला- बहुत अच्छा और सेक्सी था लेकिन कम्मो, तुम्हारी बहुत याद आती रही! और पारो कैसी है?कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक, मैं अभी चाय लाती हूँ।चाय लाई तो साथ में पारो भी थी।हम दोनों ने भी एक हॉट जफ़्फ़ी डाली और एक दूसरे को चूमा।

मैं बहुत थक गया था तो बिस्तर पर लेट गया और फिर नींद लग गई।उठा तो रात हो चुकी थी, कम्मो ने आकर पूछा- अब कैसी है थकान?मैं बोला- बहुत ठीक है।तब कम्मो ने कहा- खाना तैयार है छोटे मालिक!मैं बोला- अभी खाते हैं, वो दोनों बहनें कैसी हैं?कम्मो बोली- मज़े में हैं, वो दोनों कल चेक अप करा के आईं हैं और डॉक्टर ने कहा है कि वो दोनों अब बिल्कुल ठीक हैं।

मैं बोला- अच्छा तो कुछ कहा नहीं दोनों ने?कम्मो बोली- नहीं छोटे मालिक, अभी आई थी आपसे मिलने! आप कहो तो खाना लगा दें खाने के टेबल पर!मैं बोला- हाँ, लगा दो खाना।

फिर मैं हाथ मुंह धोकर बैठ गया और गीति और विनी भी आ गई, दोनों ने मुझसे हाथ मिलाया। कम्मो न आज ख़ास हांडी मुर्ग़ बनवाया था, वो बहुत ही लज़ीज़ था, मज़ा आ गया और पारो को बुला कर हम तीनों ने उसके खाने की बहुत तारीफ की।

खाने के बाद हम सब कोकाकोला पी रहे थे तब विनी ने कहा- हम दोनों अब ठीक हैं, हमारी बारी कब आयेगी?मैं ज़ोर से हंस दिया और बोला- विनी, हम तो हर वक्त यहीं हैं, जब चाहो अपनी बारी ले लो लेकिन कम्मो आंटी से पूछ कर और उस के साथ!

तब तक कम्मो भी आ गई थी, वो बोली- छोटे मालिक अभी सफर से आये हैं, कुछ दिन रुक कर वो तुम्हारी मुराद ज़रूर पूरी कर देंगे। क्यों छोटे मालिक?मैं बोला- हाँ हाँ, अच्छा गीति और विनी यह बताओ कि क्या तुमने कभी किसी जोड़े को सेक्स करते हुए देखा है?दोनों ने ना में सर हिला दिया।

कम्मो ने पूछा- गाँव में कभी कुत्ते कुतिया को या सांड और गाय को करते हुए देखा है?फिर दोनों ने ना में सर हिला दिया।

कम्मो बोली- ठीक है, पहले तुम दोनों को सिखाया जाएगा कि कैसे करते हैं यौनाचार!मैं बोला- यह कैसे दिखा पाओगी इनको?कम्मो बोली- कल रात को अपने कमरे में बुला लेते हैं इन दोनों को और फिर इनको करके दिखा देंगे। क्यों मंज़ूर है?दोनों ने हाँ में सर हिला दिया।

मैं बोला- ठीक है, जैसे कम्मो आंटी कहेगी वैसे ही करती जाना, ओ के?दोनों बहनें अपने कमरे में चली गई और मैं अपने बेड पर लेट गया।

तकरीबन एक घंटे बाद कम्मो और पारो दोनों आई, दोनों ने सुन्दर साड़ी पहन रखी थी, साथ ही मैचिंग ब्लाउज भी और सबसे नई चीज़ यह थी कि दोनों ने ब्रा भी पहन रखी थी।

मैंने पारो को आलिंगन बद्ध किया और उसके होटों को खूब चूसा और उसके मोटे मम्मों को ब्रा के ऊपर से छेड़ा। फिर मैंने खुद ही उस की साड़ी उतारनी शुरू की।साड़ी के नीचे उसने उसी रंग का पेटीकोट पहन रखा था।

फिर मैंने उसके बटन खोले और पारो ने अपना ब्लाउज खुद ही उतार दिया। उसने बड़ी ही कसी हुई अंगिया पहन रखी थी जो एकदम नई थी और उसके मम्मों पर पूरी तरह से फिट थी।मुझको ब्रा उतारने का कोई अनुभव नहीं था। कम्मो ने आगे बढ़ कर उसकी पीठ पर दो हुक्स को खोला और ब्रा एकदम मम्मों से अलग हो गई, पारो के मम्मे एकदम उछल कर बाहर आ गए जिनको मैंने सीधे अपने मुंह में ले लिया।

थोड़ा उनको चूसने के बाद मैंने कम्मो की साड़ी उतारी और फिर ब्लाउज और वैसे ही उसकी ब्रा भी उतारी। पेटीकोट को उतारने के बाद जब दोनों नंगी हो गई तो मैंने उन दोनों को ध्यान से देखना शुरू किया।

वैसे तो उनको नंगी मैंने कई बार देखा था लेकिन आज कुछ ख़ास बात थी और वो थी कुंवारी लड़कियों के शरीर और इन चुदी हसीनाओं के शरीर में ख़ास अंतर को ढूंढना।

हम तीनो नंगे खड़े थे और वो दोनों मेरे लौड़े को देख रही थी।कम्मो बोली- छोटे मालिक, आपने इन दो दिनों कितनी लड़कियाँ चोदी थी नैनीताल में?

मैं बोला- चार लड़कियाँ थी जो मुझ से चुदाने को तैयार थी और मैंने उन चारों को एक साथ खूब चोदा।कम्मो बोली- पहली रात कितनी थी और दूसरी रात कितनी?मैंने कम्मो को सारी कहानी सुनाई और बताया कि वो शायद यहाँ भी आएँगी। और यह भी बताया कि चारों पहले से खुली बोतलें थी तो बहुत ही आनन्द आया उन कुंवारी चूतों को बारी बारी से चोद कर और वो सब मेरी पक्की मुरीद बन गई हैं।

मैं बोला- कम्मो डार्लिंग, मैंने एक बार भी अपना नहीं छूटने दिया ताकि उनको कोई खतरा न हो बच्चे का! आज तुम दोनों मेरा रुका पानी छूटा दो यारो!कम्मो और पारो बोली- आप लेट जाओ छोटे मालिक, बाकी हम सब कर लेंगी।

मैं पलंग पर आराम से लेट गया और वो दोनों लगी मुझको काम सुख देने।कम्मो मेरे लंड को चूसने लगी और पारो मेरे छाती की चूचकों को जीभ से चाटने लगी। पारो की चुसाई से मेरे अंदर लहर दौड़ गई और मेरा लंड एकदम कम्मो के मुंह में हिलौरें मारने लगा।

कम्मो लंड चुसाई के बाद मेरे अंडकोष को चूमने और चूसने लगी। मेरी एक उंगली कम्मो की चूत की सैर कर रही थी और उसमें से निकल रहे रस को निकाल कर उसके भग पर मसल रही थी।उधर पारो की चूत भी बहुत अधिक पनिया रही थी।

फिर कम्मो और पारो ने अपनी पोजीशन बदली, कम्मो मेरे ऊपर उलटी लेट गई और मेरे लंड को अपने मोटे और सॉलिड मम्मों के बीच रख कर ऊपर नीचे होने लगी, चूत से निकल रहे रस को वो मेरे लंड पर लगा कर मम्मों से मुझको चोद रही थी।

पारो ने अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी और मेरी जीभ उसके भग को चूस और चाट रही थी।इन सब हरकतों से मैं छूटने के कगार पर पहुँच गया, मैं झट से कम्मो को अपने ऊपर से हटा कर उसके ऊपर चढ़ गया और एक दहकते इंजन की तरह उसकी फूली हुई चूत में लंड को डाल कर बगैर गियर लगाए पिस्टन को अंदर बाहर करने लगा।थोड़ी देर में ही मेरा फव्वारा ऐसा छूटा जैसे कि रेगिस्तान में बादल फ़ूट पड़ा हो।

तब पारो मेरे लंड को अपने मुंह से साफ़ करने लगी और मेरा और कम्मो का मिक्स रस वो चाट गई। पारो ने मेरे लंड को जो अभी भी खड़ा था, फिर चूसने लगी और थोड़ी देर में वो भी उसको चूत में डाल कर ऊपर नीचे करने लगी।

उसने झुक कर अपने मम्मों को मेरे मुंह के पास कर दिया जिससे मुझको उनको चूसने में आसानी हो और मैं बिना रुके उनकी चूचियों को चूसने लगा। पारो ऊपर से लेट कर अपनी चूत को मेरे लंड के ऊपर रख कर खूब धक्के मारने लगी और थोड़ी देर में वो अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई और मेरे ऊपर बैठे ही उसकी चूत सुकड़न और खुलने लगी।

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मैंने भी लंड को चूत से निकाल कर उसकी मोटी गांड के मुंह पर रख दिया और एक ज़ोर के धक्के में लंड पूरा गांड के अंदर चल गया। पारो को गांड चुदाई में भी काफी मज़ा आता था, वो फिर ऊपर नीचे होने लगी, मैं उसके नीचे लेटे हुए ही गांड चुदाई की मस्ती देने और लेने लगा।

पारो का मुंह एकदम खुला हुआ था और उस सारा ध्यान उसका गांड में आ रहे मज़े पर टिका हुआ था। अब वो ऊपर से बहुत ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड के ऊपर उठ बैठ रहीं थी और मुझको लगा कि वो फिर झड़ने वाली है।

मैंने अपने नीचे से धक्के और तेज़ कर दिए और फिर मेरा फव्वारा लंड से एक बार फिर छूटा और पारो को अपने साथ लेकर स्खलित हो गया।मैं चुदाई के बाद काफी थक गया था तो उन दोनों के गले में बाहें डाल कर सो गया।

सुबह मैं काफी देर से उठा क्यूंकि कॉलेज की छुट्टी थी।जब उठा तो कम्मो मेरे लिए गरम चाय लेकर आई हुई थी और फिर मैं चाय पीते हुए कम्मो के मोटे और सॉलिड मम्मों के साथ खेलता रहा।कम्मो मुस्करा रही थी।

मैंने पूछा- क्यों मुस्करा रही हो मेरी जान?वो बोली- रात को तो आपने हद कर दी!मैं चौंक कर बोला- क्यों ऐसा क्या किया मैंने?वो हँसते हुए बोली- सोने से पहले आप मुझको और पारो को एक एक बार चोद चुके थे लेकिन कल रात में आप सोये सोये ही मेरे ऊपर चढ़ गए और मेरा 2 बार छूटा कर फिर सो गए और 2 घंटे बाद आप पारो पर सोये सोये ही चढ़ गए और बंद आँखों किये ही उसको भी एक बार छूटा कर फिर सो गए।

मैं एकदम हैरान था क्योंकि मुझको कुछ भी याद नहीं कि मैंने ऐसा किया था।कम्मो बोली- इसमें घबराने की कोई बात नहीं, कभी कभी जब आदमी बहुत थका होता है न, तो वो अंजाने में ऐसा कर सकता है।

मैं नंगा ही उठा और अपने बैडरूम में टहलने लगा।इतने में गीति कमरे का भिड़ा दरवाज़े को खोल कर कमरे में आ गई। उसका हाथ शर्म से अपने मुंह पर जा पहुँचा जब उसने देखा कि मेरा लंड एकदम लोहे की रॉड की तरह खड़ा हुआ है।मैं भी चौंक गया लेकिन फिर मैंने अपने को संभाल लिया।

मैं बोला- गीति शर्माओ नहीं, तुमने तो मुझ को पहले भी नंगा देखा है न?गीति के चेहरे पर शर्म की लाली चढ़ी हुई थी और वो कोशिश कर रही थी कि उसकी नज़र मेरे खड़े लौड़े पर न पड़े पर वो बार बार चोर नज़र से मेरे लंड को ही देख रही थी।उसने वापस जाने की भी कोई कोशिश नहीं की और वो ऐसे खड़ी थी जैसे किसी ने उसको सम्मोहित कर दिया हो।मैंने पूछा- कैसे आना हुआ अभी? क्या तुम कॉलेज नहीं गई आज?

गीति थोड़ी संयत हो गई थी, बोली- आज हमारे कालेज में भी छुट्टी है तो हम दोनों घर पर ही हैं।मैं बोला- चलो अच्छा है।गीति बोली- मैं तो यह पूछने आई थी कि हम 3- 4 सहेलियाँ पिकनिक के लिए जा रही हैं, सोमू, तुम चलोगे हमारे साथ?मैं बोला- ऐसा है गीति, मैं कल रात नैनीताल से वापस आया हूँ, काफी थका हुआ हूँ।

वो मुड़ी जाने के लिए फिर न जाने क्या सोच कर मुड़ी और तेज़ी से आई और मेरे खड़े लंड को चूम कर भाग गई।कम्मो यह सारा नज़ारा देख रही थी दरवाज़े के पीछे से, वो हँसते हुए आई और बोली- वाह छोटे मालिक, मान गए ! आप वाकयी में प्रेमियों के बादशाह हो।मैं बोला- आओ ज़रा पकड़ो तो सही इस लंड को, बैठ ही नहीं रहा साला!

कम्मो मुस्कराती हुई आई और मेरे लंड के साथ खेलने लगी, फिर उसने उसको मुंह में डाल लिया और चूसने लगी।मैं बोला- अरे कम्मो, दरवाज़ा तो बंद कर ले ना यार, नहीं तो कोई और आ जायेगा।

कम्मो गई और दरवाज़ा बंद कर ही रही थी कि विनी आ गई, उसकी आवाज़ सुन कर मैं बाथरूम में भाग गया, मुझको कमरे में न देख कर वो वापस चली गई।

कम्मो ने बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाया और मैं वैसे ही बाहर निकल आया, बाहर आते ही मैंने कम्मो को पकड़ लिया और उसकी धोती को पीछे से ऊंचा कर दिया और उसको पलंग के ऊपर हाथ रख कर खड़ा कर और फिर मैंने ज़रा सी थूक लंड पर लगाई और हिनहिनाते लंड को कम्मो की चूत में घुसेड़ दिया।

पहले धीरे धीरे शुरू कर के तेज़ी से धक्के मारे तो कम्मो जल्दी ही झड़ गई और फिर मैंने लम्बे लम्बे धक्के लगाये यानि पूरा निकाल कर फिर पूरा अंदर डाल कर धक्के मारना शुरू किया।और तकरीबन 10 मिन्ट की चुदाई में ही कम्मो फिर कांपती हुई झड़ गई।अब कम्मो बोली- बस करो छोटे मालिक, बहुत हो गया।

मैंने अपना लंड निकाल लिया और कम्मो ने अपने पेटीकोट से मेरा लंड साफ़ किया और अपनी धोती नीचे करके बाहर जाने के लिए तैयार हुई फिर वो रुक कर मुझको एक ज़ोर से प्यार की जफ़्फ़ी मारी और लबों पर गीली चुम्मी की और बोली- एक बात कहूँ छोटे मालिक?मैं बोला- हाँ हाँ, बोलो?कम्मो बोली- छोटे मालिक, आपकी जो भी बीवी होगी, वो बहुत ही खुशकिस्मत होगी।मैं बोला- क्यों क्यों?कम्मो हँसते हुए बोली- आप उसकी इतनी चुदाई करोगे, वो आपकी ग़ुलाम बन कर रहेगी हमेशा।मैं भी हँसते हुए बोला- कम्मो, तुम ही चुनना, जो भी लड़की तुमको पसंद होगी, मैं उससे ही शादी करूंगा। ठीक है न?कम्मो बोली- ठीक है छोटे मालिक, मैं ही चुन लूंगी आपके लिए लड़की।यह कह कर वो चली गई।

रात को खाना खाने के बाद दोनों बहनें मेरे कमरे में एकत्रित हुईं, कम्मो भी आ गई। हम सबने कोकाकोला पिया और फिर बातें शुरू हुईं।कम्मो बोली- देखो गीति और विनी, तुम दोनों की योनि में काफी इन्फेक्शन थी जिस कारण से छोटे मालिक ने आपके साथ सेक्स करने से इंकार कर दिया था और मैं आपको लेडी डॉक्टर से इलाज के लिए ले गई थी। अब तुम दोनों ठीक हो और काम क्रीड़ा के लिए तैयार हो। इस बारे में छोटे मालिक आपसे कुछ पूछना चाहते हैं। ठीक है?दोनों ने हाँ में सर हिला दिया।

मैं बोला- देखो, तुम दोनों मेरे पापा के खास मित्र की लड़कियाँ हो और वो तुम को मेरे को सौंप कर गए हैं ताकि तुम कॉलेज की पढाई पूरी कर सको। अब यह मेरे लिए बहुत गलत होगा कि मैं उनके विश्वास को तोडूँ और तुम से सम्बन्ध बनाऊँ।दोनों लड़कियाँ चुप रहीं।

फिर कुछ सोचने के बाद गीति बोली- सोमू, तुम ठीक कह रहे हो लेकिन हम भी तो काफी आस लगाये बैठी थी इतने दिन कि ठीक होने पर हम तुमसे ज़रूर मिल लेंगे। तुम ही बताओ कि हम क्या करें जिससे तुमको यह फीलिंग न हो कि तुम पापा के दोस्त की लड़कियों के साथ कुछ गलत कर रहो हो?

मैंने कम्मो की तरफ देखा, वो समझ गई और बोली- गीति और विनी, तुमको सोमू की भावना का आदर करना चाहये लेकिन आप दोनों की बहुत ही इच्छा है तो तुम यह कागज पर लिख कर दे दो कि तुम जो यह सब करने जा रही हो वो तुम्हारी अपनी मर्ज़ी से है और इसमें सोमू का कोई दोष या दबाव नहीं है।

दोनों झट मान गई और कम्मो ने जो कागज़ तैयार कर रखा था उस पर दोनों ने दस्तखत कर दिए।अब कम्मो बोली- अच्छा यह बताओ तुम ‘सेक्स कैसे करते हैं’ देखना चाहोगी या फिर सीधे खुद ही करने के लिए तैयार हो?दोनों बोली- देखना क्या है, जो सुन रखा है सहेलियों से वही ही तो होगा ना?

कम्मो हंस पड़ी- बड़ी जल्दी है चुदवाने की तुम दोनों को?दोनों खी खी करके हंसने लगी।कम्मो बोली- अच्छा तो उतारो अपनी साड़ियाँ और ब्लाउज एक एक कर के!

गीति बड़े नाज़ो अंदाज़ से कपड़े उतार रही थी और विनी जल्दी जल्दी सब कपड़े उतार कर मैदान में आ गई। उसके मम्मे छोटे और सख्त थे और उसके चूतड़ गोल लेकिन बहुत छोटे थे।उधर गीति भी कपड़े उतार कर तैयार होकर आ गई। वो भी पूरी कॉपी थी छोटी बहन की, दोनों काफी पतली थी लेकिन फिर भी काफी सेक्सी लग रही थी।दोनों की चूत पर घने काले बाल छाए हुए थे।

विनी जल्दी से मेरे पास आई और मेरे होटों पर चूमने लगी, गीति शांत खड़ी थी।तब तक मैं और कम्मो भी कपड़े उतार चुके थे। कम्मो के सामने दोनों लड़कियाँ बहुत किशोर युवतियाँ लग़ रही थी।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 40
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भाग 41
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भाग 43
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भाग 44
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14 मिनट 646

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

गौरव12

1 week ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

रजा आलम

3 weeks ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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