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गुरु घण्टाल पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 246 बार

मेरा गुप्त जीवन- 145

यश देव

02 Apr 2026 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 145
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कम्मो हमारे लिए कोक ले आई और कोक पीकर हम सब एकदम फ्रेश हो गए।फिर मैं मैडम को लेकर अपने बैडरूम में आ गया।

बैडरूम में पहुँचते ही अंजलि मैडम ने आगे बढ़ कर मुझको एक बहुत ही कामुक जफ्फी डाली और उसके जवाब में मैंने भी उसको अपनी बलिष्ठ बाहों में लेकर उनके लबों पर एक गर्म चुम्बन कर दिया।

थोड़ी देर हम इसी तरह एक दूसरे को चूमते चाटते रहे और फिर मैंने पहल करते हुए मैडम की शिफ़ॉन की गुलाबी साड़ी पर हाथ डाला और धीरे से उसको उतार दिया।फिर मैंने मैडम के ब्लाउज और ब्रा को उतार दिया और आखिर में उनके सफ़ेद पेटीकोट को उतार दिया।

अब थोड़ा पीछे हट कर मैं उनकी ख़ूबसूरती का रसपान करने लगा, वो वाकयी में बहुत ही सुन्दर स्त्री थी और उनकी उम्र होगी तकरीबन 25 साल!वो देखने में बड़ी ही मोहक लग रही थी जैसे साँचे में ढला हुआ शरीर और खूब मोटे और शानदार मम्मों और मोटे गुदाज़ चूतड़ों के साथ वो एक ख़ूबसूरती का मुजस्समा ही लगती थी।उनकी चूत पर घने काले रेशमी बाल छाये हुए थे जो मुझको बेहद पसंद थे।

उन्होंने बताया कि वो अभी तक शादी नहीं कर पाई क्यूंकि उनको कोई लड़का पसंद ही नहीं आ रहा था।अंजलि मैडम ने आगे बढ़ कर मेरी पैंट को उतार डाला और फिर शर्ट और बनियान।और फिर मेरे अंडरवियर में हाथ डाल कर एक झटके में उन्होंने उसको नीचे खींच डाला और साथ ही अपना मुंह भी पीछे कर लिया जैसे उसको यह अंदाजा हो गया था कि मेरा लंड आज़ाद होने पर क्या गुल खिलायेगा।

मैंने आगे बढ़ कर मैडम को अपनी बाहों में ले लिया और उनके लबों पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।मैडम भी मेरे अकड़े हुए लम्बे और मोटे लंड के साथ खेल रही थी। वो नीचे झुकी और मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और हाथों से मेरे अंडकोष के साथ खेलने लगी।

मैंने मैडम को उठाया और बेड पर लिटा दिया, स्वयं उनकी जांघों के बीच में बैठ कर उनकी चूत की चुसाई शुरू कर दी। मेरी जीभ मैडम की भग के साथ खलने लगी और उनकी चूत के अंदर गोल गोल घूमने लगी।मैडम का सर आनन्द से इधर उधर होने लगा और उस ने दोनों हाथ से मेरे सर को अपनी चूत में दबा रखा था।

जैसे जैसे ही मैं उनकी भग को चूसता जा रहा था, मैडम का तिलमिलाना और भी तेज़ हो गया और उनकी जांघें कभी मेरे सर को जकड़ रही थी और कभी उसको और छोड़ रही थी।फिर मैडम का कंपकंपी के साथ मेरे सर को जांघों में जकड़ कर एक ज़ोरदार स्खलन हो गया और मैडम उसके बाद निढाल होकर लेट गई।

फिर मैंने महसूस किया कि मैडम की चूत लबालब पानी से भर गई है तो मैडम की टांगें चौड़ी करके मैंने उनके बीच में बैठ कर लंड का निशाना चूत के मुख पर लगा कर एक ज़ोर का धक्का लंड से मारा तो वो सुपारे समेत अंदर जा घुसा।अंजलि मैडम के मुंह से यकलख्त ही निकल गया- हाय मैं मरी रे!

लंडम लाला को धीरे धीरे जड़ तक पूरा अंदर डाल कर मैं मैडम के मम्मों को चूसने लगा। उनके निप्पल एकदम खड़े हो गए थे और उन चूचुकों को चूसने से और ही आनन्द आ रहा था।मैडम ने अब नीचे से चूतड़ों की थाप देना शुरू कर दी और मैं भी लयबद्ध हो कर चुदाई में संलग्न हो गया, कभी तेज़ स्पीड और कभी आहिस्ता स्पीड को जारी रखते हुए मैंने मैडम को कुछ क्षणों में पुनः झड़ने पर मजबूर कर दिया।

झड़ते समय मैडम की कंपकंपाहट काफी तीव्र थी और उसकी दोनों जांघें मेरी कमर के चारों और लिपटी हुई थी और उन्होंने मुझको अपने निचले हिस्से के साथ पूरी तरह से बाँध रखा था।मैडम के स्खलित होने के बाद मैंने मैडम को बेड पर दोनों हाथों को नीचे टिका कर खड़ा कर दिया, फिर मैंने अपना गीला लंड धीरे से उसकी चूत में पीछे से डाल दिया।

इस पोज़ में मैडम ने शायद पहले कभी नहीं चुदवाया था इस लिए वो बार बार पीछे मुड़ कर देख रही थी कि मैं क्या कर रहा हूँ।मैंने अक्सर यह नोट किया है कि कई औरतों को यह संदेह होता है कि इस पोज़ में शायद उनका प्रेमी उनकी गांड तो नहीं मार रहा इसलिए वो बार बार पीछे मुड़ कर चेक करती रहती हैं।

अब मैंने शुरू में आहिस्ता चुदाई से बढ़ते हुए फुल स्पीड पर मडम की चूत की चुदाई शुरू कर दी। मैडम अपनी चुदाई का पूरा आनन्द लेने लगी और पूरे जोश से वो चुदाई में मेरा पूरा साथ देने लगी।चुदाई के दौरान मेरा हाथ उसकी चूत के ऊपर रखा हुआ था जिससे मैं मैडम की भग को छेड़ रहा था ताकि मैडम काफी गर्म होकर जल्दी ही स्खलित हो सकें।

मेरी कोशिश के कारण मैडम का शरीर लहलहाते हुए झड़ने के निकट पहुँच गया लेकिन मैंने उसकी भग को मसलना छोड़ दिया और फिर हल्के धीमे धक्कों में पुनः वापस आ गया जिसके कारण मैडम के झड़ने को टाल दिया।मेरी चुदाई की कला के कारण मैडम को पूरा आनन्द तो आ रहा था लेकिन उसके स्खलित होने का समय मैं टालता जा रहा था।

तीन चार बार ऐसा करने के बाद मैडम ने मुझको पीछे से हटा दिया और मुझको एक झपाटे से बिस्तर पर लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ बैठी और बड़ी ही तेज़ रफ़्तार से उन्होंने मुझको चोदना शुरू कर दिया।वो आँखें बंद करके बिना रुके मुझको चोद रही थी और वो झड़ने के निकट पहुँच रही थी, वो जल्दी जल्दी से ऊपर नीचे हो रही थी और ऐसी मेहनत के बाद वो शीघ्र ही स्खलित हो गई और इस बार उसकी चूत में से काफी गाढ़ा पदार्थ निकला जो मेरे पेट पर फ़ैल गया और वो स्वयं निढाल हो कर मेरे पेट पर लेट गई।

मैंने उसके होटों पर गर्म गर्म चुम्बन देने शुरू कर दिए और इसके कारण वो मुस्कराते हुए मेरे ऊपर लेटी रही और कुछ अस्फुट शब्दों में बोलने लगी- थैंक यू सोमू यार, तुमने मेरी महीनों की प्यास मिटा दी!मैं मैडम को चूमते हुए बोला- आपका स्वागत है मैडम जी, जब भी आपका दिल करे, आप एक फ़ोन कर के आ जाओ, मैं आपके लिए सदा हाज़िर हूँ।

फिर हम एक दूसरे की बाहों में कुछ देर ऐसे ही लेटे रहे।थोड़े समय बाद मैंने फिर कोशिश की मैडम को पुनः चुदाई के लिए तैयार कर लूं लेकिन मैडम ने मेरा हाथ रोक दिया और प्यार से कहने लगी- बस सोमू, अब और नहीं!और यह कहते हुए मैडम उठी, अपने कपड़े पहनने लगी और मैं भी उसके अनुकरण में कपड़े पहनने लगा।

मैंने मैडम से पूछा- क्या लोगी मैडम, ठंडा या फिर गर्म?मैडम बोली- एक कप गर्म कॉफी का मिल जाए तो मज़ा ही आ जाए!

मैंने कम्मो को आवाज़ दी और जब वो आई तो मैंने उसको दो कप कॉफ़ी बनाने के लिए कहा।दस मिन्ट में काफी तैयार हो गई और हम मज़े से उसका स्वाद ले ही रहे थे कि कम्मो तेज़ी से आई और बोली- छोटे मालिक, बाहर कुछ लड़कियाँ आई हैं जो आपसे मिलने के लिए ज़िद कर रही हैं।मैंने मैडम की तरफ देखा और बोला- सॉरी मैडम, शायद मेरे कुछ फैन आई हैं, अगर आपकी इजाज़त हो तो अंदर बुला लेता हूँ उनको?

मैडम ने सहमति में सर हिला दिया और कम्मो बाहर जा कर 5-6 बड़ी ही स्मार्ट लड़कियों को अंदर लेकर आ गई।उनमें से जो सबसे शोख और तेज़ तर्रार लड़की थी, वो बोली- सोमू जी, हमने आपकी पिक्चर देखी है और हम सब आपके डांस की मुरीद हो गई हैं।मैंने ख़ुशी जताते हुए उनका थैंक्स किया और पूछा- आप सबकी क्या सेवा करें?सबने अपनी ऑटोग्राफ कापी आगे बढ़ा दी और मैंने बारी बारी से उन सब पर अपने दस्तखत कर दिए।

अब अंजलि मैडम बोली- अच्छा सोमू, मैं अब चलती हूँ, कल कॉलेज में मिलते हैं।मैं उनको बाहर कार तक छोड़ आया, अंदर आकर मैंने उन लकड़ियों से पूछा- आप क्या लेंगी? ठंडा या फिर गर्म?उनमें से तेज़ तर्रार लड़की बोली- मेरा नाम श्रुति है, आपके कॉलेज में फर्स्ट ईयर आर्ट्स में पढ़ती हूँ और ये सब भी वहीं पढ़ती हैं।

फिर श्रुति ने सबसे मिलवाया और कहा- ये सब भी आपका चिपको डांस देख कर आप पर पागल हो रही हैं, क्या करना चाहिए?कम्मो जो यह सब बातें सुन रही थी, बोली- छोटे मालिक ने जो डांस किया है, वो तो सिर्फ पिक्चर तक ही है ना… उसके बाद आप क्या करना चाहती है?श्रुति बोली- हम सोमू जी से दोस्ती करना चाहती हैं।मैं बोला- तो ठीक है, कल कॉलेज में मिलते हैं, वहीं पक्की दोस्ती कर लेते हैं। क्यों ठीक है ना?

सबने बड़ी मुश्किल से हाँ की और फिर सबको कम्मो ने कोल्ड ड्रिंक्स पिला कर रवाना कर दिया।

थोड़ी देर बाद उर्वशी भाभी और रति दोनों ही आ टपकी और दोनों ही मेरे साथ हल्की फुल्की चुहलबाज़ी करने लगी।उर्वशी भाभी भी मेरी डांस वाली पिक्चर देख आईं थी तो वो और रति दोनों मेरे साथ चिपको डांस करने के लिए काफी उतावली हो रही थी।मैंने भी उन दोनों का दिल रखने के लिए चिपको डांस करने के लिए हामी भर दी।

और तब रति ने आगे बढ़ कर मेरे रिकॉर्ड प्लेयर पर चिपको डांस वाला गाना लगा दिया और हम तीनों मज़े मज़े से चिपको डांस की नक़ल उतारने लगे।रति के साथ डांस पहले शुरू किया और वो इतनी ज़्यादा कामुक हो चुकी थी कि वो बिना किसी शर्मो लिहाज़ के अपनी सलवार कमीज में लिपटी हुई गांड मेरे लौड़े के ठीक सेंटर में रख कर खूब सेक्सी डांस करने लगी, यहाँ तक कि मेरा लंड भी एकदम खड़ा हो चूका था और रति की गांड की दरार में तकरीबन घुसा हुआ था।

अब भाभी को भी होशियारी आनी शुरू हो गई थी और जैसे ही रति और मैंने डांस का एक चक्कर खत्म किया, भाभी ने लपक के रति को हटा दिया और स्वयं मेरे साथ अपनी गोल और उभरी हुई गांड को लंड के ऊपर रगड़ने लगी और मुझको अपनी बाहों में लेकर कभी आगे से और कभी पीछे से अपने शरीर को मेरी पैंट में खड़े हुए लंड से रगड़ने लगी।

भाभी तो इतनी कामुक हो गई थी कि मुझको लगा कि दूसरे चक्कर के दौरान में वो पूरी तरह से स्खलित हो गई और उनके शरीर में एक हल्की सी कंपकंपी दौड़ गई और वो मुझसे चिपक कर झूमने लगी।

मैं उसको चुप रहने के इशारे कर रहा था लेकिन वो अब अपने गोल गदाज़ मुम्मे मेरी छाती से रगड़ रही थी बिना भाभी की परवाह किये हुए।मैं और कंम्मो हैरान थे लेकिन वो दोनों मस्त हुई मेरे साथ काफी देर चिपको डांस करती रहीं एक के बाद एक!

फिर अचानक भाभी की नज़र घड़ी पर पड़ी और वो चौंक कर बोली- चलो रति, तुम्हारे भैया आने वाले होंगे।रति बोली- आप चलो भाभी, मैं थोड़ी देर में आती हूँ।

भाभी ने मेरी आँखों में देखा और बिना कुछ बोले वहाँ से चली गई।अब रति तो मुझको तकरीबन घसीटती हुए बैडरूम में ले गई और मेरे खड़े लंड को पैंट से निकाल कर चूसने लगी और फिर बोली- जल्दी करो सोमू, एक छोटी सी चुदाई कर दो मेरी प्लीज!

मैं अब काफी चिढ़ गया था, मैंने उसको बेड पर हाथ टिका कर खड़ा किया और रति ने स्वयं ही अपनी सलवार ढीली कर नीचे खिसका दी और मैंने अपना लंड उसकी गीली चूत में पीछे से डाल दिया।मैं तो धक्के मारने की लय के बारे में सोच ही रहा था, रति ने बड़ी तेज़ी से अपनी गांड को आगे पीछे कर के मुझको ही चोदना शुरू कर दिया।

तकरीबन 10 मिन्ट की तीव्र धक्काशाही में रति का तीव्र स्खलन हो गया और वो बेड में औंधे मुंह ही लेट गई।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
भाग 1
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भाग 6
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भाग 26
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भाग 30
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भाग 31
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भाग 32
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भाग 33
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भाग 34
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भाग 36
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भाग 43
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भाग 44
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भाग 46
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भाग 48
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भाग 50
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भाग 52
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भाग 54
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भाग 55
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भाग 56
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भाग 57
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भाग 61
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भाग 64
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भाग 65
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भाग 81
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भाग 82
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भाग 83
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भाग 84
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भाग 85
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भाग 86
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भाग 87
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भाग 88
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भाग 89
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भाग 90
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भाग 91
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भाग 92
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भाग 93
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भाग 94
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भाग 95
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भाग 96
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भाग 97
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भाग 98
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भाग 99
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भाग 104
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भाग 105
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भाग 106
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भाग 107
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भाग 109
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भाग 190
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7 मिनट 387

पाठकों की राय

1 टिप्पणी

राजीव भारद्वाज़

1 week ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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