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लड़कियों की गांड चुदाई पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 563 बार

मेरा गुप्त जीवन -45

यश देव

13 Oct 2025 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -45
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कम्मो काफ़ी देर चोदती रही मुझको… और जब उस का मन भर गया तो उसने मुझको कुछ इस तरीके से चोदा कि मेरा फव्वारा छूट गया।फिर हम एक दूसरे के बाहों में ही सो गए।

अगले दिन सोनू, छवि और उनकी सहेलियाँ अपने घर चली गई। कॉलेज से वापस आने पर कम्मो ने बताया कि गाँव से फ़ोन पर निर्मल से बात हुई थी, वो कह रही है कि फुलवा के घर में भी लड़का हुआ है। बधाई हो आपको बहुत सी, फिर पिता बन गए आप!यह कहते हुए वो मुझको चिड़ा रही थी।मैं बोला- चलो अच्छा हुआ, उसको भी बच्चे की आवश्यकता थी।

अगले दिन जब मैं कॉलेज पहुंचा तो मेरे एक खास मित्र ने सूचना दी कि कालेज की ड्रामा क्लब अपने मेंबर्स को 3 दिन के ट्रिप पर ले जा रही है, यह ट्रिप नैगीताल इत्यादि सुन्दर स्थलों की सैर करवाएगा, प्रत्येक छात्र और छात्रा को 100 रूपए देने होंगे।सारे छात्र कालेज द्वारा एक बस में ले जाए जाएंगे, खाने-पीने और रहने का बंदोबस्त भी कालेज ही करेगा, जो जाना चाहेंगे उनको नाम जल्दी लिखवाना पड़ेगा और पैसे भी शीघ्र ही देने होंगे।

शाम को घर आकर मैंने गाँव फ़ोन किया और पूछा तो मम्मी बोली- ज़रूर जाओ और पैसे की ज़रूरत हो तो फ़ोन कर देना, मैं बैंक में डलवा दूँगी।मैंने कहा- ठीक है।

अगले दिन मैंने अपना नाम लिखवा प्रिया और पैसे भी दे दिए, कम्मो ने मेरे जाने की तैयारी भी शुरू कर दी।उस रात मैंने कम्मो और पारो को खूब चोदा। पारो बेचारी कुछ कम चुदी थी तो उसकी चुदाई पर ख़ास ध्यान प्रिया।

कम्मो बोली- छोटे मालिक, क्या आपका दिल कभी गांड चोदने का नहीं करता?मैं बोला- गांड चोदने के बारे में कभी सोचा नहीं। क्यों तुम्हारा दिल है गांड मरवाने का?कम्मो बोली- मैंने भी कभी गांड मरवाई नहीं न, तो कभी कभी इच्छा करती है कि गांड चुदाई का भी मज़ा लेना चाहये न! क्यों पारो, तुम्हारा दिल नहीं करता क्या?पारो बोली- करता तो है लेकिन फिर मन में भय आ जाता है कि कहीं दर्द न हो बहुत?कम्मो बोली- देखो पारो, जब तक करके नहीं देखते, तब तक कुछ भी डर नहीं, चलो छोटे मालिक।

मैं भी तयार हो गया।कम्मो उठी और नंगी ही रसोई में चली गई और देसी घी थोड़ा सा कटोरी में ले आई। फिर उसने अपनी और पारो की गांड के ऊपर और अंदर देसी घी काफी सारा लगा प्रिया और कुछ देसी घी उसने मेरे लौड़े पर भी लगा प्रिया।अब हम तीनों का बदन देसी घी से महक रहा था।

पहले बिस्तर पर कम्मो घोड़ी बनी और पारो मेरे और कम्मो के बीच में मदद करने के लिए बैठ गई।

पारो ने मुझको और धक्का मारने का सिगनल प्रिया और मैंने ज़रा और लंड अंदर धकेल प्रिया। मुझको ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड एक बड़ी टाइट पाइप के अंदर जा रहा था।

इस तरह धीरे धीरे कम्मो की गांड में मेरा सारा लौड़ा समा गया। लंड की जो हालत थी वो ब्यान नहीं की जा सकती क्योंकि गांड की बहुत ज्यादा पकड़ होती है और लंड बेचारा यह महसूस कर रहा था जैसे उसको एक बहुत ही तंग जेल की सलाखों में बंद कर प्रिया गया।

फिर भी मैंने धीरे धीरे धक्के मारने शुरू किये।पारो लगातार कम्मो को देख रही थी और जब उसने देखा कि कम्मो को मज़ा आने लगा है तो उसने मुझको इशारा किया और मैंने धक्कों की स्पीड तेज़ कर दी।

अब मैंने महसूस किया कि मेरे लंड को कम्मो की गांड, जैसे गाय का दूध दोहते है, वैसे खुल और बंद हो रही थी, इस कारण मुझको बहुत ही आनन्द आ रहा था और मैं थोड़े समय में ही एक ज़ोरदार धक्के के बाद छूट गया।लेकिन मैंने लंड को निकाला नहीं और उसको वैसे ही सख्त हालत में गांड के अंदर ही पड़ा रहने प्रिया।

इधर पारो कम्मो की चूत को और उसके भग को मसल रहे थी जिससे कम्मो का मज़ा बहुत अधिक बढ़ गया था, वो अब गांड को खुद ही आगे पीछे करने लगी और मैंने अपने धक्के रोक दिए और कम्मो की गांड चुदाई का आनन्द लेने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने महसूस किया कि कम्मो की गांड एक बार फिर खुल बंद हो रही है।मैंने उससे पूछा- क्यों कम्मो, एक बार और छूटा तेरा?उसने हाँ में सर हिला प्रिया।तब मैंने कहा- और चोदूँ या फिर बस?कम्मो बोली- बस छोटे मालिक, बहुत हो गया।

मैं फ़ौरन घोड़ी से नीचे उतर गया।

तब पारो कम्मो की तौलिये से सफाई करने लगी। थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने पारो को इशारा किया कि आ जाओ मैदान में!

वो कुछ हिचकचा रही थी। यह देख कर मैंने कहा- पारो, अगर नहीं इच्छा, तो रहने दो, फिर कभी सही!पारो बोली- नहीं छोटे मालिक, ऐसी बात नहीं है। मैं सोच रही थी कि आप थोड़ा आराम कर लेते तो ठीक होता न!मैं बोला- नहीं नहीं, मैं बिल्कुल नहीं थका हूँ। अगर गांड मरवाने की इच्छा है तो आ जाओ। नहीं तो मैं तुम्हारी चूत ही ले लेता हूँ। बोलो जल्दी?पारो बोली- आ जाओ छोटे मालिक, आज गांड मरवाई का भी मज़ा ले लेती हूँ।

कम्मो उठी और उसने फिर से देसी घी मेरे लंड पर लगा प्रिया और कॅाफ़ी सारा पारो की गांड में डाल प्रिया।पारो बिस्तर में घोड़ी बन गई तो मैं उसके पीछे खड़ा हुआ और कम्मो ने मेरा लंड पारो की गांड पर रख प्रिया और बोली- मारो धक्का हल्का सा!

मैंने भी हल्का सा धक्का मारा और लंड बहुत सा अंदर चला गया, पारो ज़रा भी नहीं हिली और जल्दी ही पूरा लंड अंदर ले गई।

पारो की गांड मुझको कुछ कम टाइट लगी।फिर मैंने लंड की स्पीड धीरे धीरे तेज़ कर दी।थोड़ी देर बाद मुझको लगा कि पारो को गांड में बड़ा मज़ा आ रहा है, वो बाकायदा लंड का जवाब हर बार गांड को को मेरे लंड की जड़ तक लाकर देती थी।अब मैंने तेज़ी से उसकी गांड में अपना लंड पेलना शुरू कर प्रिया और मुझको लगा कि उसकी चूत से भी पानी टपकना शुरू हो रहा है।हाथ लगाया तो वाकयी उसकी चूत से बड़ा ही गाढ़ा रस निकल रहा था।

मैंने उसकी भग को रगड़ना शुरू कर प्रिया और ऊपर से गांड में धक्के भी तेज़ कर दिए थे।कोई 10-12 धक्के इसी तरह ज़ोर से मारे तो पारो का शरीर काम्पने लगा और उसकी गांड अंदर से बंद और खुलना शुरू हो गई।

पारो हल्के से बोली- बस करो छोटे मालिक, मेरा पानी दो बार छूट चुका है गांड मरवाते हुए… उफ़्फ़, बड़ी ही मज़ेदार चुदाई है गांड की भी, मज़ा आ गया कम्मो।

मैं फिर दोनों के बीच में लेटा था।और इस तरह हम तीनों नंगे ही एक दूसरे के साथ चिपक कर सो गए।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

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