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Group Sex Story पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 560 बार

मेरा गुप्त जीवन -51

यश देव

23 Oct 2025 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन -51
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शानू जो बानो को ध्यान से देख रही थी और उसके छूटने इंतज़ार बड़ी बेसब्री से कर रही थी, एकदम चौंक कर बानो से बोली- छूट रहा है री तेरा तो! सोमू जल्दी से धक्के मारो, बानो छूटने वाली है।

और मैंने अपने धक्कों की स्पीड एकदम तेज़ कर दी और तभी नीचे लेटी बानो ने मुझ को कस कर टांगों में पकड़ कर ज़ोर से काम्पने लगी। मैंने भी उसको कस कर अपने सीने से लगा लिया और उसके मम्मों को एकदम क्रश कर प्रिया।कुछ मिन्ट हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे।बाकी दोनों लड़कियाँ भी छूट चुकी थी और एक दूसरी की बाहों में लेटी हुईं थी।

अब निम्मी की बारी थी, मैंने उसको इशारा किया- आ जाओ और साथ में कोकाकोला की बोतलें भी लाओ और सब पियो और पिलाओ।मैं बैठ गया और कोकाकोला पीने लगा।

मेरा लंड अभी भी वैसे ही खड़ा था क्योंकि ना वो कल छूटा था न वो आज अभी तक छूटा था। मैं नहीं चाहता था कि किसी लड़की के अंदर छूटा कर उसका जीवन मुसीबत में डालूँ इसलिए मैं अपने को रोक रखने की शक्ति का इस्तेमाल कर रहा था।कोकाकोला पीने के बाद हम सब फ्रेश हो गए थे, निम्मी मुझसे चिपक कर बैठ रही थी और उसके गोल मम्मे मेरी बाजू से लग रहे थे। उधर मैरी भी मेरे नज़दीक आने की कोशिश कर रही थी.

बानो के चहरे पर एक बड़ी ही मीठी मुस्कान छाई हुई थी और वो बार बार अपनी चूत में हाथ डाल कर देख रही थी कि मेरा तो कुछ भी नहीं छूटा था।शानू मेरे वाले बेड को फिर से तैयार कर रही थी।

तभी निम्मी बोली- क्यों सोमू, तुम मुझको और मैरी को साथ साथ नहीं चोद सकते क्या? जैसे कल चोदा था।मैं बोला- चोद सकता हूँ लेकिन अब मेरा छूटने का टाइम है तो ध्यान से चोदना होगा दोनों को! क्यों मैरी तुम राज़ी हो ना?मैरी बोली- हाँ हाँ सोमू, कल भी तुमने हमको ऐसे ही चोदा था आखिरी बार।मैं बोला- चलो आ जाओ मैदान-ए-जंग में!

मैंने दोनों को एक बहुत ही सख्त आलिंगन किया और दोनों को अपने से पूरा चिपका कर उनके होटों पर गहरी चुम्मी की।उधर शानू एक हाथ अपनी चूत में डाल कर बैठी थी और दूसरे से अपने मम्मे दबा रही थी।मैंने बानो को इशारा किया कि वो अपनी पार्टनर को सम्भाले।

बानो उठी और जाकर शानू की गोद में बैठ गई और उसके लबों पर गर्म गर्म चुम्बन देने लगी।शानू ने भी अपनी बाहें बानो की चारों तरफ डाल कर उसको कस कर जफ़्फ़ी दे दी।

इधर मैंने निम्मी को छुआ चूत पर, वो बुरी तरह से गीली हो चुकी थी और उसका अपना रस उसकी जांघों के नीचे बह रहा था।और मैरी भी वैसे ही काफी गीली और चुदवाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी।

अब शानू ने उन दोनों को घोड़ी बना कर पलंग पर बैठा प्रिया और मुझको आकर बोली- हज़ूर, घोड़ी तैयार है, आप सवारी कर लीजिये।यह सुन कर हम सब बहुत ज़ोर से हंस पड़े।

मैंने बिस्तर पर चढ़ कर पहले मैरी की चूत में लौड़ा डाला और उसको पहले धीरे धीरे और फिर तेज़ और फिर धीरे इसी क्रम में चोदने लगा, ज़ोरदार धक्कों के बाद मैंने लौड़ा निकाल लिया और निम्मी की फूली हुई चूत में डाल प्रिया।दोनों चूतों का अंतर इसी तरह की चुदाई में सामने आता है। मैरी की चूत गहरी लेकिन खुली थी और निम्मी की चूत एकदम तंग और बड़ी ही फिसलन भरी थी, उसकी चूत में लंड डालते ही वो कहीं का कहीं पहुँच जाता है और मैरी की चूत में लंड का जाना एक गुफा में जाने के समान था।

अभी तक सबसे मज़ेदार चूत बानो की ही लगी लेकिन निम्मी की भी कुछ कम नहीं थी, गद्देदार और काफी रसीली थी उसकी चूत!उसको चोदते हुए मुझको बहुत आनन्द आ रहा था और जब मैरी में डालता था तो लम्बी गहरी गुफा का मज़ा आता था।उन दोनों को चोदते हुए मुझको दस मिन्ट हो गए थे लेकिन दोनों ही छूटने का नाम नहीं ले रही थी।

मैं बोल पड़ा- कौन पहले छूटेगी? लगायेगा कोई शर्त? मैं शर्त लगाता हूँ कि पहले निम्मी छूटेगी। दस रुपये की शर्त है, बोलो कोई और लगाने को तैयार है क्या?

शानू बोली- 20 रूपए की शर्त, पहले मैरी छूटेगी!बानो बोली- नहीं पहले निम्मी छूटेगी, 30 की शर्त लग गई।मैं बोला- 40 की शर्त, पहले निम्मी छूटेगी।

दोनों लड़कियाँ हमारी दोनों साइड में खड़ी हो गई और ‘बक अप मैरी…’ मत छूटना तुम लगी रहो और ‘निम्मी मत छूटना यार… सोमू को जोर लगाने दो!’ वगैरह बोलने लगी और एकदम से दोनों की चुदाई में खासा जोश आ गया।

तब मैंने भी धक्के कभी आहिस्ता और कभी तेज़ कर दिए, कभी मैरी की चूत में तेज़ धक्के मारता और कभी निम्मी की चूत में तेज़ी दिखाता।मेरा ध्यान केंद्रित था निम्मी को पहले छुटाने का और कभी यह ध्यान मैरी की तरफ चला जाता।

मैरी और निम्मी चुदाई का खूब मज़ा ले रही थी, मुझको पता लगे बगैर वो दोनों दो दो बार झड़ चुकी थी, यह उन्होंने मुझको बाद में बताया और दोनों ने हम सबको खूब उल्लू बनाया और मन ही मन मुस्करा रही थी दोनों।आखिर कॅाफ़ी समय हो गया चुदाई में, मैंने मैरी की चूत में ऊँगली डाल कर उसकी भग थोड़ी देर मसला और फिर वैसा ही किया निम्मी के साथ।

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थोड़ी देर में जब मैं निम्मी की चूत में ऊँगली से कर रहा था तो मैंने कुछ इस तरह से उसको चोदा कि मेरा लंड कभी रेल की स्पीड से अंदर बाहर हो रहा था और जैसे मैं चाहता था, निम्मी की कोशिश के बावजूद वो छूटने की कगार पर पहुँच गई और मेरे एक गहरा धक्का लगते ही वो छूट गई और सिसकारी भरने लगी।

यह मसहूस करते ही निम्मी की चूत ने बंद और खुलना शुरू कर प्रिया और ज़ोर से काम्पने भी लगी। उसी के साथ ही जब मैंने मैरी की चूत में लौड़ा डाला तो वो भी दो तीन धक्कों में छूट गई।

मैंने अपना गीला लौड़ा मैरी की चूत से निकाल कर नंगे ही डांस करना शुरू कर प्रिया और चिल्लाना शुरू कर प्रिया- मैं जीत गया, मैं जीत गया!

सब लड़कियाँ बहुत हंस रही थी और शानू तो मेरे पीछे पीछे भाग रही थी और बोल रही थी- मेरा क्या होगा सोमू? मेरा क्या होगा सोमू?मैं रुक गया और बोला- तुम्हारा क्या होना है यार?वो रुआंसी हो कर बोली- मेरे को कौन चोदेगा यारो? मैं तो रह गयी कुंवारी?सब लड़कियाँ खूब हंस रही थी, मैं भी खूब हंसा और सबको बोला- धीरे प्लीज, बाहर कोई सुन न ले अंदर कि क्या हो रहा है।

अब मैंने शानू को पकड़ लिया और उसको बाँहों में लेकर बॉल डांस शुरू कर प्रिया। मेरा खड़ा लौड़ा शानू की चूत के ऊपर रगड़ा मार रहा था डांस करते हुए।फिर मैंने शानू के चूतड़ों के नीचे दोनों हाथ रख कर उसको थोड़ा ऊपर उठा लिया और शानू ने अपनी जांघें खोल कर मेरी कमर के इर्दगिर्द फैला दी, ऐसा करने से उसकी चूत का मुंह मेरे लौड़े के समानांतर आ गया और फिर मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत के मुंह पर रख प्रिया और हॉट एंड सेक्सी डांस करने लगा।

शानू तो चुदाई के लिए बेताब हो रही थी, उसने झट से अपनी चूत का धक्का मारा और मेरा लंड आधे से ज्यादा शानू की प्यासी चूत में चला गया।उसने फिर एक ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लंड चूत के अंदर था।शानू अब मेरे हाथ में अपने चूतड़ों को हिला हिला कर लंड का मज़ा ले रही थी, वो बेसब्री से आगे पीछे हो रही थी, उसकी चूत असल में पनिया रही थी और उसकी चूत से गिर रहे पानी से मेरे हाथ भर गए थे।

खड़े खड़े शानू को चोदना मेरे लिए एक नया तजुर्बा था क्यूंकि मैंने यह आजतक कभी नहीं किया था।शानू को लबों पर गहरी चुम्मी देते हुए मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने शुरू कर दिए और वो भी जल्दी से अपने चूतड़ों को आगे पीछे मेरे हाथों पर करने लगी।फिर मैंने महसूस किया कि शानू की चूत सकुड़ और खुल रही है जिसका मतलब साफ़ था कि वो भी झड़ने के नज़दीक है।

अब मैंने उसके चूतड़ कस के अपने हाथों में जकड़ लिए और वैसे ही मैंने चूत की गहराई तक जाने वाले धक्के मारने लगा और तीन चार धक्कों में ही शानू मेरे हाथों में तड़फड़ाने लगी और उसकी मेरे चारों तरफ लिपटी जांघें सिकुड़नी और खुलनी शुरू हो गई।

हम सब अपने कपड़े पहनने लगे, तब शानू ने कहा- सोमू, अब कब मिलोगे?मैं बोला- जब कहोगी मिल लेंगे यार! तुम जैसे प्यारे दोस्तों से मिलने में क्या कष्ट हो सकता है।शानू बोली- लखनऊ में कहाँ रहते हो?मैंने कहा- निम्मी, तुम एक कागज़ में हम सबके फ़ोन नंबर नोट करो और फिर सुबह उसकी एक कॉपी सबको दे देना।सबने अपने फ़ोन नंबर नोट करवाये।

सब जाने के लिए तैयार हो गई थी, तब मैंने उन सब को सम्बोधित किया- यारो, तुम सब अति सुंदर और प्यारी कन्याएँ हो। जाने से पहले मुझ को एक बात बता दो, आप सब फ्रैंकली बताना कोई शर्म वर्म नहीं, ठीक है?सब बोली- ठीक है, पूछो क्या पूछना चाहते हो?

मैं बोला- जैसे कि आपने देखा कि कल के और आज के कार्यक्रम में हम सब एक दूसरे के काफ़ी नज़दीक आ गए हैं। मैं यह पूछना चाहता हूँ कि आप सबने मुझमें ऐसी क्या बात देखी कि मेरे साथ एकदम खुला व्यव्हार शुरू कर प्रिया बगैर किसी तरह की शर्म वर्म के। यहाँ तक पूरी तरह से नंगे होकर हम एक दूसरे से मिलते रहे? ऐसी क्या बात थी जिसने आपको आकर्षित किया यह करने के लिए? मुझमें ऐसा क्या आकर्षण था कि आपको मेरी तरफ पूरा खींच लाया?

चारों लड़कियाँ चुप रही और एक दूसरी को देखने लगी, फिर सबसे पहले शानू ही बोली- सोमू यार, कुछ तुम्हारे चेहरे में है जो हर लड़की को अपनी तरफ खींचता है, शायद तुम्हारे चेहरे की मासूमियत और तुम्हारी आँखों में झलकता सबके लिए प्रेम भाव है जो किसी भी लड़की को अपनी तरफ खींचता है और सबसे बड़ी अट्रैक्शन जो मैंने महसूस की, वो है हर वक्त सोमू के खड़े लंड का कमाल।

निम्मी बोली- जो ख़ास बात मुझको लगी, वो यह है कि सोमू को अपने पास बिठा कर भी हमारे साथ कुछ भी छेड़खानी ना करने की कोशिश से मन में प्यार उमड़ा था और सोमू के प्रति विश्वास की भावना पैदा हो गई थी।

मैरी और बानो ने कहा- यह बात तो है लेकिन हमारे ख्याल में सोमू की आँखों में एक तरह की शरारत झलकती है जिससे कोई भी लड़की या औरत इसकी तरफ झुकी जाती है, इसका चेहरा बहुत ही मासूम लगता है और ख़ास तौर से लड़की या औरत इसको अपने गले लगाने की कोशिश करती है।

मैंने सब लड़कियों के लबों पर चुम्बन किया और कहा- आप जब चाहो मेरी कोठी आ सकती हो और जो चाहो मांग सकती हो, लंड से ले कर फंड तक! मैं कोठी में अकेला रहता हूँ 2-3 नौकरों के साथ। जो सेवा आप कहोगी, वो करने की पूरी कोशिश की जायेगी।थैंक यू गर्ल्स… आप सब बहुत ही सुंदर और सेक्सी हो और मेरी यह दुआ है कि आप सबको ऐसा ही लंड नसीब हो जिससे आप सभी पूरी तरह से खुश रहें।फिर वो एक एक करके मुझको चूमती हुई अपने कमरों में चली गई।

अगले दिन नैगीताल से चल कर हम शाम को लखनऊ पहुँच गए।कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

कुल भाग: 189
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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

विम्मी सचदेवा

3 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

श्रेया करमाकर

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

शिवम पांडे 3

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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