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मेरा गुप्त जीवन- 188

यश देव

15 Apr 2014 को प्रकाशित

मेरा गुप्त जीवन- 188
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कोच अटेंडेंट ने बड़ी मुस्तैदी से हमारी सेवा की रहा और हर प्रकार से हमारे खान पान का पूरा ध्यान रखा।हम केबिन के दरवाज़े और खिड़कियां बन्द कर के आराम से अपनी सीटों पर बैठ गए।

एक घंटे की गपशप के बाद एक बार फिर शशि भाभी मेरी सीट पर आ बैठी और कम्मो मनोज के साथ बैठ गई।

शशि मेरी गोद में आ कर बैठ गई और अपना सर मेरी छाती के साथ टिका कर मेरे हाथ को अपनी नाइटी के अंदर चूत पर रख दिया और अपने हाथ को मेरे पजामे के अंदर डाल कर अभी मेरे अध खड़े लन्ड को हाथ में ले लिया और उसके साथ खेलने लगी।

थोड़ी देर में ही मेरा भोलू मछरने और मचलने लगा और भाभी भोलू के इस खेल को भली भान्ति समझ गई और स्वयं ही नीचे झुक कर मेरे लन्ड को चूमने लगी लेकिन अभी भी उन के मन में उसको चूसने में झिझक नज़र आई।

दूसरी सीट पर कम्मो अपनी नाइटी उतार चुकी थी और मनोज भैया भी एकदम नंगे खड़े थे और कम्मो उनके अधखड़े लौड़े को बड़े प्यार से चूस रही थी।

जब इस सीन पर भाभी की नज़र पड़ी तो वो भी अपनी नाइटी उतारने लगी और मुझ को भी अपने कपड़े उतारने के लिए बाध्य करने लगी।थोड़ी देर में ही एक ही केबिन में हम सब नंग मलंग पड़े हुए थे।

शशि भाभी ने आव देखा न ताव और झट से बैठ कर मेरे लौड़े को मुंह में ले लिया और जैसे कम्मो उसको चूस रही थी वैसे ही उन्होंने मेरे लन्ड को चूसना शुरू कर दिया।

मैंने कम्मो की आँखों में देखा तो वो मुस्करा रही थी जैसे कह रही हो देखा छोटे मालिक कैसे बदल गया है इन मियां बीवी का तौर तरीका।कम्मो ने मुझको इशारा किया कि मैं गर्भाधान का कार्यक्रम पुनः शुरू कर दूं तो मैंने भाभी को ऊपर उठाया और उसके गर्म और गीले होटों पर एक बहुत ही गर्म चुम्मी दी और उसको लेकर सीट पर लिटा दिया।

भाभी अपनी टांगें चौड़ी करके मेरे सामने लेटी थी और उसकी चूत के अंदर की लालिमा साफ़ दिख रही थी और उस में से हल्का सा सफेद रस टपक रहा था जिसको मैं झुक कर चाट गया और भाभी की बालों से भरी चूत में खड़े उनके गोल भग को चूसने लगा।

भाभी की चूत में मुंह लगाते ही वो तड़प उठी और अपनी टांगों और जांघों के गर्मागर्म गोल गुदाज़ जेल में मेरे मुंह को जकड़ लिया।मैं भाभी की भग अपने मुंह में रोल करता रहा जब तक भाभी के शरीर में एक हल्की सी कम्पकपी शुरू न हुई।

मैंने भाभी के कान में कहा- शशि भाभी, अब फिर गर्भाधान की आखरी कोशिश कर रहा हूँ, आप महालड़ाई के लिए तैयार हो जाओ।

इतना कह कर मैंने भाभी को घोड़ी बना दिया और खुद उसके पीछे बैठ कर पहले तो उन की गोरी गांड को सराहा और फिर उसके गोल चूतड़ों को सहलाया और फिर अपने घोड़े का मुंह उन के खुले द्वार पर टिका कर एक हल्का सा धक्का मारा और लन्ड का मुखड़ा उन की लाली भरी चूत के अंदर चला गया।

मैंने बड़े ही धीरे धीरे चुदाई का आलम बनाना शुरू किया और जब दूसरी सीट पर देखा तो वहाँ मनोज भी हमारी चुदाई की नकल कम्मो के साथ कर रहे थे यानी वहाँ भी दूल्हा घोड़ी नुमा कम्मो के ऊपर चढ़ा हुआ था और मेरे समान ही हल्के धक्के मार रहा था।

अब मैंने मनोज को देखते हुए कहा- क्यों भैया, घुड़सवारी की रेस लगाते हो?भैया बोले- वो कैसे?मैंने कहा- हमारे नीचे दो घोड़ियां हैं, हम उनको कभी आहिस्ता और कभी तेज़ भगाएंगे जिसकी घोड़ी पहले छूटे या फिर पहले थक जाए वो शहसवार हार गया समझो? क्यों ठीक है क्या?

भैया के बोलने से पहले कम्मो बोल पड़ी- सोमू लल्ला, मत लगाओ रेस, तुम जानते तो हो मनोज के नीचे घोड़ियों की महारानी कम्मो मस्त घोड़ी है उसको कोई भी नहीं हरा सका आज तक!

मैं बोला- वह तो ठीक है अगर घोड़ी पर बैठा शहसवार ही गिर जाए तो घोड़ी बेचारी क्या करेगी जी?कम्मो बोली- नहीं, यह तो ठीक रेस नहीं है, मेरा शह सवार अभी नया है घोड़ी दौड़ाने में उसका भरोसा नहीं लेती मैं! और भैया जी भूल गए क्या अभी तो आपका काम शशि भाभी के साथ अधूरा है।

मैं थोड़ा शर्मिंदा होते हुए बोला- ठीक है भाभी जी, आप मनोज भैया से फ़ारिग़ हों तो मैं अपना काम शुरू करूँ ना!इन सारी बातों के दौरान मनोज और शशि मज़े से चुदवा रहे थे, चोद रहे थे।

थोड़ी देर में कम्मो ने अपनी चूत से कुछ ऐसा कमाल किया कि मनोज भैया को सर झुका कर घोड़ी से उतरना पड़ा।कम्मो अब अपनी चूत को तौलिये से साफ़ करती हुई आई और मेरे पास आकर खड़ी हो गई और मेरे चूतड़ों पर और तेज़ दौड़ने की थपकी देने लगी।

शशि भाभी अभी तक 2 बार स्खलित हो चुकी थी लेकिन वो मेरे लौड़े का आनन्द लेने के लिए अभी भी पूरी तरह से तैयार थी।कम्मो अपने हाथ से भाभी की चूत के अंदर भग को मसलने लगी, तभी भाभी भी उछल उछल कर चुदवाने लगी और काफी तेज़ी से आगे पीछे होने लगी।

अब मैंने शशि की कमर को कस कर पकड़ लिया और तीव्र गति से अपने काले मोटे भोलू को इंजन के समान अंदर बाहर करने लगा।

भाभी यह तीव्र हमला बर्दाश्त नहीं कर सकी और जल्दी ही अपना पानी छोड़ बैठी और मेरे लन्ड के साथ अपनी गांड को जोड़ कर आराम करने लगी।

जब भाभी की सांस थोड़ी सामान्य हुई तो मैंने अपने लंड की स्पीड तेज़ कर के उसकी चूत की गहराई में अपनी पिचकारी छोड़ दी।मेरे गर्म पानी की गर्मी से भाभी थोड़ी और हिलने लगी और मैंने उसकी गांड को अपने लन्ड के साथ जोड़ रखा था।

कम्मो ने तौलिया तैयार रखा हुआ था और जैसे ही मैंने अपने टपकते हुए लंड को भाभी की चूत से निकाला तो उसने लपक कर भाभी की चूत पर तौलिया रख दिया और उसको सीधा लिटा कर उसकी टांगें हवा में खड़ी कर दी।एक दो मिनट के बाद भाभी को टांगें सीधी करने दी लेकिन तौलिया चूत के बाहर ही रखा।

हम सब अब आराम के मूड में आ गए और नंगे ही अपने साथी के साथ चिपक कर बिस्तर में लेट गए।घड़ी में समय देखा तो अभी केवल रात के 9 बजे थे।

अभी नींद की एक हल्की सी झपकी ही लगी थी कि ट्रेन में केबिन के दरवाज़े पर खटखटाहट शुरू हुई।मैंने लेटे लेटे ही पूछा- कौन है?

बाहर से एक जनाना आवाज़ आई- मेरे साथ वाली लड़की को बहुत तेज़ दर्द है, प्लीज हेल्प कीजिये जल्दी।मैंने सबकी तरफ देखा तो कम्मो ने इशारा किया कि खोल दो दरवाज़ा।

मैंने जवाब दिया- प्लीज रुकिए, हम दरवाज़ा खोल रहे हैं।

हम सबने फुर्ती से अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए, औरतों ने तो झट से नाइटी अपने ऊपर डाल ली सिर्फ हम मर्दों को थोड़ा टाइम लगा क्योंकि पजामा और कुरता भी पहनना था।

मैंने दरवाज़ा खोलने से पहले सब को देखा, सबने अपने कपड़े पहन रखे थे तो मैंने बेधड़क दरवाज़ा खोल दिया।

बाहर एक बहुत ही सुंदर लड़की खड़ी थी जो घबराहट के मारे ज़ोर ज़ोर से कांप रही थी।कम्मो झट सामने आ गई और उस लड़की के साथ उसके केबिन की तरफ चल पड़ी और पीछे पीछे मैं भी चल पड़ा।

उस लड़की का केबिन बिल्कुल हमारे साथ वाला था और दोनों उसी केबिन में घुस गई लेकिन मैं बाहर ही खड़ा रहा।

पांच मिनट के बाद कम्मो केबिन से निकली और जल्दी से अपने केबिन में चली गई और अपने बैग में से दवाइयों का बॉक्स उठा लाई और फिर वो केबिन बन्द हो गया।

मैं अपने केबिन में आ कर अपनी सीट पर बैठ गया और दूसरी सीट पर भैया और भाभी बैठे हुए थे।

कोई आधे घंटे के बाद कम्मो वापस लौटी लेकिन उसके पीछे दो लड़कियां भी थी, एक तो वो थी जो पहले आई थी और दूसरी कोई और लड़की थी जो काफी स्मार्ट दिख रही थी और थोड़ी घबराई हुई थी शायद उसको ही कुछ तकलीफ थी।

कम्मो और दोनों लड़कियां मेरे सीट पर बैठ गई।

दोनों नई आई लड़कियां मुझ को बड़े ध्यान से देख रही थी और मुझ के एक टक घूर रही थी, उनके इस व्यवहार से मैं थोड़ा शरमा गया।तब कम्मो बोली- सोमू भैया, आप ने इस लड़की को पहचाना नहीं?

कम्मो ने उस बीमार दिखने वाली लड़की की तरफ इशारा करते हुए कहा- याद करो सोमू, दिमाग़ पर ज़ोर डालो तो याद आएगा?

मैंने थोड़ी देर याद करने की कोशिश की लेकिन मैं उस लड़की को नहीं पहचान पाया तो कम्मो बोली- अरे यह जूली है ना… जो डांस पार्टी के साथ हमारे गांव आई थी शूटिंग के लिए! याद आया क्या?

अब मुझको एकदम से याद आया कि इस लड़की के साथ चिपको डांस भी किया और उसको कई बार चोदा भी था। बाकी सब डांस वाली लड़कियों के साथ!

मैं झट से बोल पड़ा- अरे हाँ यह तो वही लूली है जिसके साथ बड़ी मौज मस्ती की थी हम सबने शूटिंग के दौरान! बड़ी सुंदर लग रही हो जूली। लेकिन अभी क्या तकलीफ हो गई थी तुमको?

यह कह कर मैं जूली के पास चला गया और उससे बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया और उसका हाल पूछा।

तो वो खुश होते हुए बोली- थैंक्स सोमू, मुझको पेट का दर्द शुरू हो गया था, कम्मो दीदी ने दवाई दे दी है जिससे काफी फर्क है मुझको! थैंक्स दीदी… और सोमू तुम तो और भी हैंडसम दिख रहे हो! छोटे भैया का क्या हाल है?

इतना सुनना था कि कम्मो और मैं हंसी के मारे लोटपोट हो गए।

कम्मो ज़ोर से हँसते हुई बोली- सोमू भैया, छोटे भैया का क्या हाल है?और अब तो जूली और उसकी सहेली भी ज़ोर ज़ोर से हंसने लगी।

तब जूली ने अपने साथ वाली लड़की का परिचय दिया और कहा कि उसका नाम पम्मी और वो भी डांसर है और वो दोनों एक फिल्म की शूटिंग से वापस आ रही थी।

फिर वो दोनों कम्मो को लेकर अपने दो सीट वाले केबिन में चली गई और भाभी और मनोज फिल्मों के बारे में पूछने लगे।

अचानक भाभी मुझ को गौर से देखते हुए बोली- सोमू, क्या तुम वही हो जिसने अभी कुछ महीने पहले आई फिल्म में बड़ा ही सेक्सी डांस किया था?मैंने हाँ में सर हिला दिया और तब शशि भाभी अपनी सीट से यकलख्त उठी और मेरे पास आ कर मेरे गले से चिपट गई।

मनोज भैया भी बोलने लगे कि उनको यह शक तो था कि मुझको पहले कहीं देखा है लेकिन कहाँ और कब यह याद नहीं आ रहा था।वो भी आये और मेरे से बड़ी गर्मजोशी से हाथ मिलाया।

इतने में कम्मो फिर केबिन में आई और मुझको लेकर लड़कियों के केबिन में चली गई और जहाँ घुसते ही जूली ने मुझको एक बड़े प्रगाढ़ आलिंगन में बाँध लिया और मेरे होटों पर ताबड़तोड़ चुम्मियों की बारिश कर दी।

जूली मुस्कराते हुए बोली- यह तो पुराने वक्तों की याद में था… और अब बताओ क्या हमारा काम कर सकोगे आज की रात में? मेरा और पम्मी का… बोलो हाँ?

कम्मो बोली- छोटे मालिक तो आप सबको बड़ा याद करते रहते हैं लेकिन अभी तो हमारे साथ उस केबिन में एक लखनऊ की फ़ैमिली है न तो यह कुछ कठिन लग रहा है।

जूली बोली- मैं कुछ नहीं जानती, मेरी चूत तो मांगे सोमू का लंबा और मोटा लन्ड… क्यों पम्मी, तेरी चूत क्या कहती है?पम्मी ने मुझ को ऊपर से नीचे देखा और फिर बोली- देख जूली, यह छोकरा तेरा अकेली का ही काम कर दे तो वो भी बहुत है! यह मेरे तक पहुँच ही नहीं पायेगा। अभी उम्र ही क्या है इसकी?

अब जूली और कम्मो की हंसने की बारी थी और वो दोनों बड़ी ज़ोर से खिलखिला कर हंस दी।जूली मुस्कराते हुए बोली- ऐसा क्या? तुझे क्या यह छोकरा लगता है री साली? चल पम्मी आज हम तुझ से ही शुरू कर देते हैं सोमू जी के चुदाई के करतब? मैदान छोड़ कर भाग मत जाना जब सोमू तुझ को चोद चोद कर तेरी चूत का भोसड़ा ना बना दे तो!

मैं सिर्फ मुस्कराता रहा।

कम्मो कुछ सोचते हुए बोली- अगर तुम दोनों को ऐतराज़ ना हो तो हम सब हमारे बड़े केबिन में ही यह काम करते हैं? उन दोनों को भी मिलाना पड़ेगा अपने प्रोग्राम में क्यों तैयार हो?

दोनों एक दूसरे को देखते हुए कुछ देर चुप रही और फिर जूली बोली- हमें ऐतराज़ तो कोई नहीं अगर वो कपल भी भरोसेमंद हों तो?

कम्मो बोली- इस बात की गारंटी मैं लेती हूँ, वो जोड़ा भी हमारी तरह सेफ और साउंड है लेकिन तुम दोनों को सोमू के साथ साथ मनोज भैया को भी खुश करना पड़ेगा। बोलो मंज़ूर है?जूली बोली- उसको मैं संभाल लूंगी, एक दो झटके में ही टपक जाएगा साला!

यह कह कर जूली उठी और सीधे मेरे खड़े लन्ड को पजामे के बाहर से पकड़ लिया और पम्मी को उसको पजामे के अंदर से ही उसकी लंबाई और मोटाई दिखाने लगी।

तब जूली पम्मी से बोली- देखो पम्मी डार्लिंग, तुमने कई डांस डायरेक्टर्स से चुदवाया होगा थोड़ा सा फिल्मों में काम पाने के लिए और फिल्म लाइन में पैर ज़माने के लिए लेकिन सोमू के मामले में यह सब उल्टा हुआ है। क्योंकि जब हम इनके गांव में शूटिंग करने गए तो सोमू ने किसी भी डांसर से कभी कुछ भी नहीं माँगा लेकिन यह हम लड़कियों की आपस में होड़ लगी थी कि कौन सी लड़की सोमू को सबसे पहले चोदेगी और उसको चोदने के लिए प्रेरित कर सकेगी। है ना अजीब बात?

पम्मी हैरानी से मुझको देख रही थी और मैं सिर्फ मुस्कराने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता था।

अब जूली ने पम्मी को मेरे खड़े लन्ड के दर्शन करवाने के लिए मेरे पजामे को मेरे मना करने के बावजूद नीचे खिसका दिया और उछल कर निकले मेरे लन्ड को अपने हाथों में ऐसे पकड़ा जैसे मदारी अपने पटारे से निकलते नाग को पकड़ता है।

पम्मी की आँखें एकदम विस्फारित हुई थी और वो डरते हुए मेरे पास आई और मेरे लन्ड को पकड़ने लगी लेकिन उससे पहले ही जूली ने आगे बढ़ कर मेरे लन्ड को अपने मुंह में ठूंस लिया और उसको लबालब चूसने लगी।

कहानी जारी रहेगी।support@mohakkisse.com

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मेरा गुप्त जीवन

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

प्रवीण वशिष्ठ

1 day ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

सन्दीप सिंह कानपुर

2 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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